गांगुली और जय शाह के मुद्दे पर 2 हफ्ते बाद सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) बीसीसीआई अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे या नहीं, जय शाह सचिव पद पर बरकरार रहेंगे या नहीं, इस मामले की सुनवाई दो हफ्ते बाद सुप्रीम कोर्ट में होगी. बीसीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट में सौरव गांगुली और जय शाह का कार्यकाल बढ़ाने की मांग की है. बीसीसीआई अपने संविधान में संशोधन भी चाहता है.

दरअसल लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के मुताबिक किसी राज्य के क्रिकेट संघ और बीसीसीआई को मिलाकर 6 साल तक पदाधिकारी रहने वाला व्यक्ति 3 सालों तक कोई पद नहीं ले सकता. बीसीसीआई अध्यक्ष बनने से पहले गांगुली बंगाल क्रिकेट बोर्ड और जय शाह गुजरात क्रिकेट बोर्ड के पदाधिकारी थे और इस लिहाज से ये दोनों ही 6 साल पदाधिकारी रह चुके हैं. यही वजह है कि अब बीसीसीआई अपने संविधान में बदलाव कर इन दोनों को पदों पर बरकरार रखना चाहती है.

आदित्य वर्मा नहीं करेंगे गांगुली का विरोध

बता दें आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग के याचिकाकर्ता आदित्य वर्मा ने कहा कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) और सचिव जय शाह की विराम अवधि (कूलिंग ऑफ पीरियड) को हटाने के मसले पर उनका वकील इसका विरोध नहीं करेगा. आदित्य वर्मा की याचिका के बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा पैनल का गठन किया था जिसकी सिफारिश के बाद बीसीसीआई में आमूलचूल सुधार किये गए थे. गांगुली और शाह ने पिछले साल अक्टूबर में पद संभाला था और अब नए संविधान के मुताबिक दोनों का कार्यकाल खत्म होने वाला है.

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वर्मा ने कहा कि बोर्ड में स्थायित्व के लिए गांगुली और शाह का बने रहना जरूरी है. वर्मा ने पीटीआई-भाषा से कहा कि मैं शुरू से कहता रहा हूं कि सौरव गांगुली बीसीसीआई की अगुआई करने के लिए सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति हैं. मेरा मानना है कि बीसीसीआई में स्थायित्व के लिए दादा और जय शाह का पूरे कार्यकाल तक बने रहना जरूरी है.

उन्होंने कहा कि अगर दादा बीसीसीआई अध्यक्ष पद बने रहते हैं तो मैं सीएबी की तरफ से उनका विरोध नहीं करूंगा. इन नौ महीनों में से चार महीने पहले ही कोरोना वायरस (Coronaviurs) के कारण गंवा दिए गए हैं और किसी भी प्रशासक को अपनी योजनाओं और नीतियों को लागू करने के समय चाहिए होता है. गांगुली के छह साल इस महीने के आाखिर में पूरे होंगे. जबकि शाह का कार्यकाल पूरा हो गया है

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