कंपनी की दरियादिली, कर्मचारी का शव उसके घर भेजने में खर्च किए 50 से 60 लाख रुपये

इंदौर। कोरोना संकट में ज्यादातर जगह देखा गया है कि कंपनियों से कर्मचारियों को निकाला जा रहा है या फिर अवै​तनिक अवकाश पर भेजा जा रहा है वहीं एक ऐसी भी कंपनी है जिसने कर्मचारी की मत्यु के बाद लाखों रूपये खर्च कर उसके शव को घर भेजा। विसुवियस इंडिया लिमिटेड नाम की एक कंपनी ने दुनिया के सामने एक ऐसा उदाहरण पेश किया है, जो शायद ही देखने को मिलता है। कोलकाता में स्थित इस कंपनी ने अपने एक मैनेजिंग डायरेक्टर की मौत के बाद उनकी पार्थिव देह इंदौर में उनके घर तक पहुंचाने के लिए 180 सीटर प्लेन ही बुक कर दिया।

मृतक के परिजनों ने बताया कि जब प्लेन कोलकाता में नहीं मिला तो दिल्ली से व्यवस्था की गई। इसके लिए कंपनी ने परिवार से किसी भी तरह से मदद नहीं ली। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि कंपनी ऐसा कोई कदम उठाएगी। कंपनी ने करीब 50 से 60 लाख रुपए खर्च कर परिवार को बॉडी के साथ इंदौर भेजा। मृतक के परिजनों ने कंपनी की सराहना करते हुए कहा कि इस दौरान कंपनी के दो पदाधिकारी भी तीन दिन तक इंदौर में रहे और सभी क्रिया कलापों को संपन्न करवाने के बाद ही वापस लौटे।

दिल का दौरा पड़ने से हुई थी मौत
जानकारी के अनुसार इंदौर के उषा नगर एक्टेंशन निवासी रितेश डूंगरवाल कोलकाता में कंपनी में मैनेजिंग डायरेक्टर थे. वे कंपनी से दो साल से ज्यादा समय से जुड़े हुए थे। रितेश के साले बादल चैरड़िया के अनुसार जीजाजी की 19 अगस्त को हार्टअटैक से मौत हो गई थी। परिवारजन उनकी बॉडी को लाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन कंपनी ने परिवार के सपोर्ट के लिए तत्काल 30 कर्मचारी उनके घर पर भेज दिए। उसी दिन बॉडी को इंदौर भिजवाने के लिए प्लेन की व्यवस्था भी कर दी।

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उन्होंने कहा कि कंपनी ने जो किया वह समाज और देश के लिए एक नजीर है. कंपनी ने 50 से 60 लाख रुपए पूरी प्रक्रिया में खर्च किए होंगे। क्योंकि रुटीन में करीब 5 हजार रुपए एक व्यक्ति का किराया होता है।ऐसे में तीन अलग-अलग लोकेशन से मॉनीटर कर इंदौर भेजना, फिर खाली प्लेन का वापस जाना। कंपनी ने ऐसा कर सभी के लिए एक मिसाल पेश की है।

रितेश के भाई सौरभ डूंगरवाल का कहना हैं कि इंदौर भाई की कर्मभूमि थी, इसलिए हम चाहते थे कि इंदौर में ही अंतिम संस्कार किया जाए। शुरुआत में हमने प्राइवेट जेट से लाने की कोशिश की। जिसमें भैया के साथ भाभी और दो बच्चे आ सकें। प्राइवेट जेट का दिल्ली से कोलकाता और फिर इंदौर लाने की प्रोसेस चल रहा था, लेकिन इसमें समय लग रहा था। इसी बीच कंपनी ने अपनी ओर से एक पूरा प्लेन बुक कर दिया।

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