दिल्ली के पुराने किले के तल में मिला 400 साल पुराना कुवां, बरामद हुए मोबाइल, चश्मे और बटुए

‘पुराना किला’ दिल्ली के सभी किलों में सबसे पुराना किला है। इस सूखे पड़े किले को मजदूरों ने साफ करना शुरू किया ही था कि उन्हें किले के तल से कुछ ऐसी चीजें मिली जो किसी को भी सकते में डाल सकती थी। जी हां, सफाई में लगाए गए मजदूरों को सैकड़ों की संख्या में मोबाइल, दर्जनों चश्में और चप्पल किले की मिट्टी में दबे मिले। पुरातत्व विभाग ने जांच के बाद कहा कि कुआँ कम से कम 400 साल पुराना है। कभी शहर में पानी के अच्छे स्रोतों में गिनती किए जाने वाला किला आज पानी की एक-एक बूंद के लिए मोहताज है।

पुरातत्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि झील की ऊपरी दीवारों को लाखोरी की ईटों से बनाया गया है जबकि निचले हिस्से को पत्थर के मलबे से भरा गया है। जबकि इसकी गहराई लगभग दो मीटर ही है। यह वास्तव में कब बनाया गया और किन चीजों से बनाया गया इसकी जानकारी के प्राप्त करने लिए हमें इसकी गहराई तक जाना होगा ताकि सभी चीजें स्पष्ट हो सकें।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों ने दावा किया है कि वह उसके अस्तिस्व को अच्छी तरह से समझते हैं लेकिन किले में कई दशकों से पानी न होने के कारण उसे लगभग भुला दिया गया है। बात लगभग आज से आठ महीने पहले की है जब किले में मौजूद झील के सूखने के बाद नौकायन को बंद कर दिया गया था। एक महीने पहले एएसआई ने झील के गंदे पानी को निकालने के लिए मजदूरों को काम पर लगाया अचानक दिल्ली की इस सूखी झील को खोदते समय कुछ ऐसा सामने आया जो हैरान कर देने वाला था।

एएसआई के वरिष्ठ अधिकारी का इस घटना पर कहना है कि जब किले के पास मौजूद खंभे पानी से भरे थे तो इनको खोदने का कोई फायदा नहीं था। हम मानते है कि खाड़ी का निर्माण पानी के सूख जाने के बाद किया गया है। लेकिन यह कम से कम 400 साल पुराना है।

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साल 1955, 1969 और 2014 में 1000 साल पूर्व ईसा के समाप्ति का पता लगाने वाली एएसआई अब आगे की जानकारी जुटाने के लिए प्रयास कर रही है। किले में खुदाई में मौर्य काल से मुगल काल तक के सुंगा, कुशना, गुप्ता, राजपूत और सल्तनत काल तक के सांस्कृतियों का चित्रण का पता चला।

पुरातत्व विभाग ने किले के पुरातत्व सर्वेक्षण के लिए साल 1955 में खुदाई कर कई महत्वपूर्ण जानकारी हासिल करने के लिए किया था। जिसके बाद दोबारा साल 1969 से 1973 तक की गई। इस संग्रहालय में मौजूद सभी चीजें मुख्य रुप से उत्खनन पर ही आधारित हैं।

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