51 विशिष्ट व्यक्तियों को मिला स्वर्ण भारत हिंदी रत्न सम्मान, दिल्ली मेट्रो डीसीपी रहे मुख्य वक्ता

स्वर्ण भारत परिवार ने वेबिनार के द्वारा हिंदी दिवस मनाया, स्वर्ण भारत परिवार ने बड़ा आयोजन किया जिसमें देश के करीब सभी राज्यों से लोगो ने भाग लिया। इस मौके पर 51 व्यक्तियों को स्वर्ण भारत राष्ट्रीय हिंदी रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पीयूष पण्डित ने की व कार्यक्रम संयोजन में डॉ राधा बाल्मीकि, कंचन शर्मा, डॉक्टर सीमा मिश्र, शताब्दी अवस्थी, राठौर सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। सौ से अधिक लोगो ने कार्यक्रम में भाग लिया साथ ही कार्यक्रम के बाद सभी को प्रमाणपत्र दिए गए।

दिल्ली मेट्रो के डीसीपी जितेंद्र मणि त्रिपाठी ने अपने संबोधन में कहा दिवस मनाने से किसी भाषा का उत्थान नहीं होता, मुझे तो याद नहीं किसी देश मे उसकी मूल भाषा के उत्थान हेतु भाषा दिवस मनाया जाता हो। जब इसराइल आज़ाद हुआ, हजारो वर्ष पुरानी हिब्रू भाषा को लागू कर दिया गया। सब ने उसे पढना प्रयोग मे लाना शुरू कर दिया। ‘मगर हाय रे हिन्दी, तेरा कैसा ये दुर्भाग्य’ बड़े दुःख की बात है यहाँ आस्था मे भी तर्क किया जाता है। अगर राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, राष्ट्रीय पशु, पक्षी किसी पर मतभेद नहीं और हो भी नहीं सकता तो राष्ट्रभाषा पर ही क्यों। बड़े शर्म की बात है हम तुष्टिकरण की राजनीति राष्ट्रीय विषयो पर भी कर रहे है। जापान क्या जापानी पढ़ के आगे नहीं है, चीनी क्या चीनी भाषा पढ़ के आगे नहीं है, मगर हम अंग्रेजी भाषा पर आश्रित है। ये भाषा की गुलामी कब खत्म होगी। भारतेंदु जी ने कहा था
‘निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल’ क्या हम इसे समझ पायेंगे।

Gyan Dairy

इस दौरान स्वर्ण भारत परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष पियूष पंडित ने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दी और कहा, अब वक्त आ गया है जब हम को इस भाषा को राजकीय कार्यों की मूल भाषा बनाने का प्रयास करना चाहिए, हिंदी को भारत के माथे कि बिंदी बनाने का काम करे|

Share