राजस्थान : करीब 800 गायों की मौत, सरकर से नहीं मिली कोई खास मदद

गौ रक्षा और गौ सेवा के नाम देश जिस तरह इंसानियत का कत्लेआम हो रहा है उसे अनदेख नहीं किया जा सकता। लेकिन सवाल ये हैं की देश में हिंसा करने वाले कथित गौ रक्षकों को शायद ये खबर ज़रूर चौकाये।

राजस्थान के जालौर में हुई भीषण बारिश से 615 गायों की मौत होने का मामला सामने आया है। राजस्थान के जालौर और सिरोही जिले में भारी बरसात के चलते आई बाढ़ में अब तक 650 से ज्यादा गायों के डूबकर मरने की खबर आ रही है।

ख़बरों के मुताबिक सबसे ज्यादा मौतें पथमेड़ा ट्रस्ट द्वारा चलाई जा रही गोशालाओं में हुई है। यह ट्रस्ट राज्यभर में 10 गोशालाएं चलाता है, जिनमें 50 हजार से ज्यादा गायें पाली जाती हैं।

रिपोर्ट के अनुसार बुधवार को जहां 547 गायों के मरने की खबर थी, वहीं गुरुवार को करीब 200 गायों की मौत हुई थी। अनुसार अभी कम से कम 4,000 गायें खतरे वाली जगहों पर मौजूद हैं।

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पथमेड़ा गोशाला की पूनम सिंह राजपुरोहित के अनुसार, इस दर्दनाक घटना की वजह वहां से 10 किलोमीटर दूर स्थित एक बांध का टूटना है। उन्होंने बताया कि बांध के पानी ने मात्र कुछ मिनटों में इस गोशाला को अपनी चपेट में ले लिया था और यहां आठ फीट तक पानी भर गया था।

25 जुलाई को ऐसी तूफानी बरसात हुई कि पूरा क्षेत्र पानी में डूब गया। बूढ़ी बीमार गायों की ज्यादा आफत हुई। जगह-जगह पानी में गायों के शव बहते देखे जा सकते हैं।सरकार गोवंश को त्वरित राहत पहुंचाने में नाकाम रही।

इस मामले में गोशाला प्रबंधकों का आरोप है कि उन्हें सरकार की ओर से कोई खास मदद नहीं मिली है। राजपुरोहित ने आरोप लगाया कि जो मदद मिली है वह ऊंट के मुंह में जीरा समान है। उनके मुताबिक इस समय गायों के लिए दवाइयों और पौष्टिक आहार की भारी किल्लत हो चुकी है।

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