घोटाले जब आँख बंद करके होते हैं, तो अखिलेश के बस्ते गुजरात सरकार में बंटते हैं

गुजरात के अफसर और ठेकेदारों की साठगांठ के चलते जब लाखों स्कूली बस्ते बच्चों को बांटे गये, तो बस्तों पर पीएम नरेंद्र मोदी या सीएम रूपानी की जगह तस्वीरें यूपी के सीएम अखिलेश यादव की थी। कुछ पल के लिए ऐसा लगा मानों अखिलेश गुजरात के सीएम बन गए हों।

124 रूपये के हिसाब से 12,000 बैग स्कूल को दिए लेकिन इस बस्तों के पीछे यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव का फोटो और नाम होगा ये वो भी नहीं पकड़ पाए। जीनाभाई को हिंदी नहीं आती है, वो गुजराती में कहते हैं ‘सवा सौ रूपये के बस्तों के लिए वो क्यों बस्तों पर काला रंग लगाकर ऐसा करेंगे। वो कहते हैं ‘बस्तों में अखिलेश का फोटो है या किसी और का यह उन्हें पता नहीं है’।

सूरत की रंग अवधूत सोसाइटी में बने सम्राट अपार्टमेंट में ज़िनाभाई बोघाभाई छोटाला की ट्रेडिंग कंपनी ‘छोटाला सेफ्टी प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड’ का दफ्तर है। जिनाभाई की कंपनी तकरीबन 19 साल से चल रही है इसलिए कंपनी को गुजरात के छोटा उदयपुर जिले के वसेडी के प्राइमरी स्कूल ने ई-निविदा के जरिये 12 हजार स्कूल बैगों का ठेका मिला। इस कॉन्ट्रैक्ट की कुल कीमत 17.28 लाख थी।

गौरतलब है कि पिछले साल यूपी की समाजवादी सरकार ने छात्रों के लिए 1.8 करोड स्कूल बैगों को मंजूरी दी थी लेकिन विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद इस प्रकिया पर रोक लगा दी गई। दिलचस्प बात यह है कि जब योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने, उन्होंने अखिलेश यादव की छवि के साथ स्कूल बैगों के वितरण की अनुमति दी, क्योंकि वह सार्वजनिक धन बर्बाद करने के खिलाफ थे।

बस्ते नए थे और उनके बाहर गुजरात शिक्षा विभाग का स्टीकर लगा था। कुछ बच्चों ने जैसे ही स्टीकर निकाले तो देखा स्टीकर के पीछे एक तस्वीर है, जब यह बात अध्यापकों तक पहुंची तो फोटो यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव की निकली। बस्तों पर वहीँ स्लोगन लिखा हुआ था जो यूपी के बस्तों पर अखिलेश सरकार ने लिखवाया था – ‘खूब पढ़ो, खूब बढ़ो’

सूरत स्थित छोटाला सेफ्टी प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक जिनाभाई छालला ने इंडिया संवाद से फोन पर कहा कि  हम एक ट्रेडिंग कंपनी हैं, हम बैग बनाते नहीं हैं। जीनाभाई का कहना है कि हमने ये बैग एक एजेंट के जरिये खरीदे। हालाँकि जीनभाई ये बताने को तैयार नहीं हुए कि एजेंट ने ये बैग उनके लिए कहाँ से खरीदे।

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यूपी सरकार के लिए बनाये गए बस्ते गुजरात में आये कैसे ?

कहीं यूपी सरकार के बचे हुए बस्तों को तो बाजार में नहीं बेचा गया ?

ई-ट्रेडिंग कम्पनी ने जिस एजेंट के जरिये बस्ते खरीदे वह कौन है और बस्ते कहाँ से लाया ?

अगर ये बस्ते यूपी से गए तो, ये कोई बड़े सरकारी घोटाले की ओर इशारा करता है।

फिलहाल गुजरात के जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी महेश प्रजापति ने कहा, ‘हमने ठेकेदार को अभी तक भुगतान नहीं किया है और हम बैग की वापसी जल्द तय करेंगे।

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