नीतीश कुमार ने कहा की जिन शादियों में दहेज लिया जा रहा है, उनमें कतई न जाएं

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोगों का आह्वान किया कि संकल्प लें कि दहेज लेने वालों की शादी में नहीं जाएंगे। कोई बुलाता है तो पता कर लें कि उसने दहेज लिया है या नहीं। अगर लिया है तो शादी में नहीं जाएं। देख लीजिएगा कि इससे कितना बड़ा प्रभाव पड़ेगा। उनके इस आह्वान पर श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में खूब तालियां बजीं।

बापू के सपनों का भारत बनाना चाहते हैं मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी से हमने जो सामाजिक परिवर्तन की बुनियाद रखी है, उसे और आगे बढ़ाएंगे। हम बापू के सपनों का भारत बनाना चाहते हैं। अंबेदकर द्वारा निर्मित संविधान के मुताबिक समाज को मजबूत करने की कोशिश करते रहेंगे। इन्हीं लोगों के सिद्धांत को मार्गदर्शक बनाकर न्याय के साथ विकास के कार्य में हम लगे हुए हैं। वंचित व कमजोर तबका शिक्षत बनेमुख्यमंत्री ने अपने भाषण के दौरान तीन बार इस बात को दोहराया कि खास कर वंचित और कमजोर वर्ग के लोग शिक्षित बनें, संगठित हों और संघर्ष करें। इसके बिना कोई उपाय नहीं है। अंबेदकर का भी यही नारा था, जो आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है। असहिष्णुता का माहौल है। आखिर रोहित बेमुला को आत्महत्या के लिए क्यों विवश होना पड़ा। यह विचारणीय प्रश्न है। लोग क्या-क्या चुनाव में कहे और कुछ नहीं किये। हम किसी का नाम नहीं लेना चाहते हैं, लेकिन समाज को ही इसका फैसला करना पड़ेगा। हमने सभी तबके के लिए काम किया मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने समाज के सभी तबके के लिए काम किया है। हम चुनौती देते हैं कि कोई बता दे कि कौन से तबके के लिए हमने काम नहीं किया। हर तबके के भले के लिए नीति बनी और वह लागू हुई।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को जदयू के दलित, महादलित और आदिवासी प्रकोष्ठों की ओर से आयोजित भारत रत्न भीमराव अंबेदकर की 126वीं जयंती समारोह में बोल रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी की तरह हम और भी सामाजिक अभियान चलाएंगे। दहेज प्रथा और बाल विवाह के खिलाफ भी अभियान चलेगा। यह भी कहा कि जातियों के आधार पर बंटवारे और भेदभाव को समाप्त करना है। इसके लिए जरूरी है कि हम कुरीतियों को नहीं अपनाएं। देखा गया है कि जो सक्षम वर्ग है, हम उनकी कुरीतियों को स्वीकर कर लेते हैं। क्षमा कीजिएगा, हमें उन कुरीतियों पर नहीं चलना है। बाल विवाह से एक नहीं अनेक बीमारियां शुरू हो जाती हैं।

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महादलितों के लिए कुछ अलग से किया तो एक तबका को लोग लगे भड़काने। मार्च 2014 में ही नियम बना कि चौकीदार-दफादार नौकरी के एक महीने पहले भी वोलेंटियरी रिटायरमेंट लेंगे तो उनके आश्रित को नौकरी मिलेगी। बास भूमि के तहत दलित-महादलित को जमीन दी गई। पिछड़ा, अतिपिछड़ा, अल्पसंख्यक, महिलाएं सभी के लिए काम किया गया। कोई छात्रवृत्ति बंद नहीं किया मुख्यमंत्री ने कहा कि पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति को लेकर भ्रम फैलाया गया। हमने कोई छात्रवृत्ति बंद की है। सभी तबकों को छात्रवृत्ति का लाभ मिल रहा है और आगे भी मिलेगा। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में विकल्प रहेगा कि छात्रवृत्ति का लाभ लें या इसका। विद्यार्थी चिंता नहीं करें और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड का लाभ उठाएं। जो लोन नहीं लौटा पाएंगे, उसे सरकार देखेगी। विचारों की हत्या हो रहीपूर्व मंत्री श्याम रजक ने कहा कि देश में कई धाराएं चल रही हैं। विचारों की हत्या की जा रही है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदयनारायण चौधरी ने कहा कि अंबेदकर ने बेजुबानों को ताकत दी। मौके पर राज्य सरकार के मंत्री महेश्वर हजारी, संतोष निराला, पूर्व मंत्री रामलखन राम, हुलेश मांझी, रवि ज्योति, झूलन सिंह गौंड, राधा कृष्ण, श्याम बिहारी राम, बीमा भारती, रमेश, मनीष, शशि भूषण हजारी, अरुण मांझी, मंजू कुमार आदि ने भी विचार रखे।

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