कोरोना संक्रमण: शराब की दुकानें खोलने से क्यों डर रही है सरकार, जानिए असल वजह

नई ​दिल्ली। कोरोना संकट के चलते देश में लॉकडाउन चल रहा है। इस कारण एक माह से अधिक समय से शराब की दुकानें भी पूरी तरह से बंद हैं। तमाम रियायतों के बाद भी शराब की बिक्री से प्रतिबंध नहीं हट रहा है। ऐसे में लोगों के कई तरह के सवाल हैं, कि शराब का कोरोना से क्या लेना देना। आज हम आपको बताएंगे कि सरकार आखिर अपने अरबों रुपए के राजस्व का नुकसान करके शराब पर प्रतिबंध क्यों जारी रखे है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और एम्स नई दिल्ली के डॉक्टर शराब पीने वाले लोगों को चेता चुके हैं। डब्ल्यूएचओ भी कह चुका है कि महामारी में शराब पीने का असर रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ता है। ऐसे लोगों के चपेट में आने का खतरा अधिक है। वहीं, पंजाब, केरल और अन्य राज्य राजस्व के लिए लोगों की जान जोखिम में डालकर शराब की दुकानें खोलने पर अमादा हैं। एम्स की रिपोर्ट के अनुसार देश में करीब 5.7 करोड़ लोग शराब पीते हैं। डब्लयूएचओ के अनुसार 2018 में शराब पीने से दो लाख 60 हजार लोगों की मौत हुई थी। ऐसे में लॉकडाउन के बीच स्वास्थ्य की खातिर शराब की दुकानों का बंद रहना जरूरी है।

जहां दुकानें खुली हैं, वहां मौत का मंजर है। भारत, थाईलैंड और दक्षिण अफ्रीकी देशों में शराब की दुकानें बंद हैं, लेकिन अधिकतर पश्चिमी देशों में ऐसा नहीं है। संक्रमण से बुरी तरह ग्रस्त न्यूयॉर्क में शराब की दुकानें जरूरी सेवाओं के तहत खुल रही हैं। अमेरिका में सबसे अधिक मौतें यहीं पर हुई हैं। यूरोपीय देशों में भी डब्ल्यूएचओ की चेतावनी के बाद भी दुकानें खुली हैं, वहां मौतों का सिलसिला लगातार जारी है।

डब्ल्यूएचओ के शराब और अवैध नशीले पदार्थ की प्रोग्राम मैनेजर करिना फेरिएरा बॉर्जेस का कहना है कि दुनियाभर में हर साल शराब पीने वाले तीस लाख लोगों की मौत होती है। यूरोप में एक तिहाई मौतें शराब पीने से होती है। कोरोना से मरे लोगो में अधिकतर शराब पीते थे। इसमें भी पुरुष ज्यादा हैं। एक अध्ययन के अनुसार प्रति दस मृत संक्रमितों में से एक व्यक्ति शराब पीता था।

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नशा खुद के साथ देश के लिए घातक
लॉकडाउन के पहले हफ्ते में केरल में नौ लोगों ने शराब न मिलने के कारण आत्महत्या कर ली। इसके बाद तमिलनाडु में कुछ लोगों ने शराब की जगह दूसरा नशीला पदार्थ पी लिया जिसके कारण छह लोगों की मौत हो गई। अभी भी देश के कई राज्यों में शराब की कालाबाजारी हो रही है तो ग्रामीण क्षेत्रों में घर पर बनने वाली शराब पीकर अपना नशा पूरा कर रहे हैं। ऐसे लोग अपने साथ पूरे देश के लिए घातक हैं।

शराब से बढ़ जाता है संक्रमण का खतरा
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि ये पूरी तरह भ्रम है कि शराब पीने से वायरस मर जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एथेनॉल और मेथेनॉल मिलाकर तैयार शराब बेहद से कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें हो सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सोच समझकर फैसला लें, क्योंकि आपकी एक गलती आपकी जिंदगी और आपके परिवार के लिए मुश्किल भरी हो सकती है।

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