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महात्मा गांधी के शांति संदेश को वैश्विक स्तर पर लाने की मुहिम है ग्लोबल गांधी पीस अवार्ड: रोशनी लाल

पचास से अधिक देशों के शांति दूत करेंगे ग्लोबल पीस की बात :पीयूष पण्डित

ग्लोबल गांधी पीस अवार्ड की तैयारियों के बीच देश विदेश से लोगो के विचार स्वर्ण भारत को प्राप्त हो रहे हैं, स्वर्ण भारत परिवार की ट्रस्टी व संरक्षक रोशनी लाल ने गांधी जी के शांति संदेश को ग्लोबल बनाने के पीयूष पण्डित के निर्णय की सराहना सिडनी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की और अपने द्वारा लेख भी प्रस्तुत किया।

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उन्होने कहा, आत्मा अजर और अमर है| मृत्यु शाश्वत सत्य| जीवन उद्देस्य है| कर्म सर्वोपरि है | जन जन में परमात्मा अंश विद्यमान है | वही जीवन का आधार है| सब जन जीवन रूप में समान हैं परन्तु कर्म उन्हें लोक व्यवहार में अलग करता है |कर्म सुजन एवं दुर्जन की परिभाषाएं तय करता है , कर्म ही दुष्टात्मा अथवा महात्मा रूप में हमारा परिचय कराता है | गांधी महान थे | उनकी आत्मा महान थी | उनका व्यक्तित्व महान था | उनके कर्म विधिक लोकांक्षाओं की पूर्ति हेतु थे |उनका आचरण लोक गरिमाके अनुरूप था | काल अनंत है , अटल है , अटूट है , निरन्तर है , निर्बाध है |काल की आवश्यकताएं व्यक्ति की महत्त्वकांक्षों की परवाह नहीं करतीं | कठिन काल अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप जन को महान बना देता है | गांधी अपवाद नहीं हैं | काल रथ ने उन्हें महात्मा बनाने को विवश कर दिया |यही जीवन का अभीष्ट है . काल का गौरव है , मोहनदास का सुकर्म है | व्यक्तित्व आधार चाहता है |गांधी के विचार उनके व्यक्तित्व के आधार हैं | गांधी अहिंसा के पुजारी हैं |मन,कर्म वचन की स्वीकारिता ही अहिंसा का सिद्धांत है |गांधी की स्वीकृति अहिंसा है |वे विचारात्मक अहिंसा को स्वीकार करते हैं| वे हिंसा का जवाब हिंसा से नहीं अपितु मौनात्मक तरीके से देने को कहते हैं |जब हिंसात्मक पलटवार नहीं होगा व्यक्ति स्वयं अपनी कारगुजारियों से ऊब जायेगा | यही वह समय है जहाँ अहिंसा का समन्वयनात्मक मार्ग शांति के सन्देश के रूप में आता है और एक हिंसक व्यक्ति अहिंसा का वरण कर लेता है | यही अहिंसा है |शांति को शांति पूर्वक कायम करना ही गांधी का अहिंसात्मक मार्ग है| गांधी वैश्विक हैं |विश्व निरन्तर विस्तार पथ पर है | मानव प्रगति के नित नए नए सोपानों का विज़न कर रहा है | सबमे स्वयं को पीछे छोड़ने की प्रतिस्पर्धा है | प्रतिस्पर्धा में टकराहट आम बात है | टकराहट हिंसा का सूचक है | हिंसा प्रगति की बाधक है |मानव को नई उचाइयां छूनी हैं | विश्व को अनंत प्रस्तरित होना है | विस्तार में बाधा अस्वीकार्य है |टकराहट का समाधान अहिंसात्मक मार्ग से ही संभव है |गांधी अहिंसात्मक मार्ग के प्रणेता हैं | शांति के उपासक हैं |समन्वय के उदहारण हैं |विश्व को गांधी की आवश्यकता है |सृजन की निरंतरता गांधी की स्वीकारिता में है | यही कारण है की गांधी अपने अहिंसात्मक मार्ग के शांति संदेश के साथ विश्व में कल प्रासंगिक थे, आज आवश्यकता हैं और सदा सदा के लिए विश्व में समाहित हो उसके भविष्य के मार्गदर्शक हैं | गांधी जयंती पर ग्लोबल गांधी पीस अवार्ड्स के माध्यम से स्वर्ण भारत शांति संदेश को ग्लोबल बनाने का यूँ ही प्रयास करता रहे जय हिंद ।

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