गुजरात 2002: तब एमजे अकबर ने अरुण जेटली से पूछा था- आप हिंदुओं के कानून मंत्री हैं या हिन्दुस्तान के?

28 फरवरी 2002 मेरे लिए दूसरे आम दिनों जैसा ही था। मैं वाराणसी में था और बतौर प्रोफेसर यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के एक स्टूडेंट प्रोग्राम का मूल्यांकन कर रहा था। वो दौर सोशल मीडिया का नहीं था। हां केबल टीवी ज़रूर आ चुका था। लेकिन गुजरात की ख़बरें हम तक नहीं उस तरह नहीं पहुंचती थीं जैसे आजकल ताबड़तोड़ मिलती हैं।

जब मैं शाम को दिल्ली पहुंचा तो मुझे अमेरिका से एक कॉल आया। अमेरिका के पीबीएस न्यूज़ऑवर नाम के एक टीवी शो में गुजरात के मुद्दे पर लाइव प्रसारण में शामिल होने के बारे में पूछा। शो भारतीय समय के अनुसार सुबह 4.30 बजे और अमेरिका के पूर्वी तट पर शाम 6 बजे प्रसारित होना था। उनका कहना था कि गुजरात में हुई हत्याएं जघन्य थीं। मैं उस शो के लिए हां नहीं कह सका क्योंकि उसी वक़्त मुझे अमेरिका के लिए निकलना था। वे जानते थे कि येल यूनिवर्सिटी प्रेस से मेरी किताब “एथनिक कॉन्फ्लिक्ट एंड सिविक लाइफ: हिंदूज एंड मुस्लिम्स इन इंडिया” हाल ही में आई थी। उन्हें पता था कि किताब में तीन अध्याय गुजरात के बारे में हैं।

अमेरिकी न्यूजचैनल से आए फोन को रखने के बाद मैंने टीवी ऑन किया तो मामला साफ होने लगा। टीवी पर एमजे अकबर (जो उस समय कांग्रेसी नेता थे और अब बीजेपी की केन्द्र सरकार में मंत्री हैं) और तत्कालीन कानून मंत्री और मौजूदा वित्त मंत्री अरुण जेटली के बीच बहस चल रही थी। एमजे अकबर लगभग दहाड़ते हुए पूछ रहे थे कि, ‘आप हिन्दुओं के कानून मंत्री हैं या या हिन्दुस्तान के’। जेटली भौचक थे उनसे जवाब देते नहीं बन पा रहा था। आधी रात तक ये स्पष्ट हो चुका था कि बड़ी संख्या में मुसलमानों की हत्या की जा रही थी। इसे गोधरा में हिन्दू कारसेवकों को ला रहे ट्रेन के दो डब्बों को कथित तौर पर मुसलमानों द्वारा जला देने का बदला बताया जा रहा था।

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जबतक मैं मिशीगन पहुंचा ये साफ हो चुका था कि राज्य सरकार मुसलमानों पर बदले की भावना से हो रहे हमले को रोकने में ना सिर्फ फेल साबित हुई थी बल्कि वो अपने दायित्व से मुंह भी फेर चुकी थी या इन्हें बढ़ावा दिया था। जिन लोगों ने साबरमती एक्सप्रेस को जलाया था उनकी पहचान करना सरकार का संवैधानिक दायित्व था। सरकार का काम बदले की भावना से हमला होने देना या उसे बढ़ावा देना नहीं था।

कुछ दिनों के बाद CNN के एक शो में मैं तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ था। उसी सुबह (सात मार्च, 2002) को न्ययॉर्क टाइम्स में सीलिया डगर की एक स्टोरी छपी थी जिसमें उन्होंने अहमदाबाद में मुस्लिम बच्चों के शवों को सामूहिक रूप से दफन किए जाते देखने का जिक्र किया था। CNN पर नरेंद्र मोदी ने तर्क दिया कि गुजरात में अब हालात काबू में हैं, और जिन्होंने भारत का बंटवारा कराया था (दूसरे शब्दों में पाकिस्तानी मुसलमान) की साजिशों को नाकाम कर दिया जाएगा। उनके पास गुजरात के मुसलमानों के लिए सहानुभूति के कोई शब्द नहीं थे।

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