हाईकोर्ट ने लगाई रोक, छात्रों का विरोध-प्रदर्शन रोकने के लिए

जवारहलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के फ्रीडम स्क्वायर यानी ऐड ब्लॉक पर अब किसी तरह का विरोध प्रदर्शन नहीं हो पाएगा. दिल्ली हाईकोर्ट ने यहां के 100 मीटर के दायरे में विरोध प्रदर्शन पर पाबंदी लगा दी है.

दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव सचदेव ने निर्देश दिया है कि इस आदेश को लागू करने के लिए अगर ज़रूरत पड़े तो पुलिस बल का प्रयोग करे. हालांकि, अदालत ने पुलिस को यह भी निर्देश दिया कि वह किसी तरह की अप्रिय घटना के मामले में छात्र-छात्राओं के साथ निपटने के तरीके के बारे में संवेदनशील रहे.

हाईकोर्ट ने पुलिस को यह भी निर्देश दिया है कि यूजीसी 2016 के नए नोटिफिकेशन के ख़िलाफ़ विश्वविद्यालय में चल रहे प्रदर्शनों के बीच छात्र-छात्राएं किसी भी तरीके से कुलपति और दूसरे अधिकारियों या कर्मचारियों को ऐड ब्लॉक (प्रशासनिक भवन) में जाने से न रोक पाएं.

प्रशासनिक भवन जाने के लिए बनीं सीढ़ियां पिछले साल नौ फ़रवरी की घटना के बाद फ्रीडम स्क्वायर के नाम से चर्चित हो गईं. नौ फरवरी को कैंपस में देशविरोधी नारे लगाने की बात सामने आई थी.

जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष मोहित पांडेय ने अदालत की इस आदेश पर आपत्ति जताई है. वे कहते हैं, प्रदर्शन करना हमारा अधिकार है और इस आदेश के पीछे कुलपति का हाथ है. वह हमारा अधिकार छीनना चाहते है. इस आदेश के ख़िलाफ़ हम राजनीतिक और कानूनी रूप से लड़ाई लड़ेंगे.

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बहरहाल, छात्रों का मानना है कि उन्होंने यह स्थान सिर्फ़ विरोध प्रदर्शन और अपनी आवाज़ उठाने के लिए इस्तेमाल किया है, चाहे वो फेलोशिप की बात हो या रोहित वेमुला के आत्महत्या या नजीब अहमद के लापता होने का मामला.

बता दें कि फ्रीडम स्क्वायर वहीं स्थान है जहां राष्ट्रवाद को लेकर जेएनयू के शिक्षकों ने बहुत सारे लेक्चर दिए थे. यहां पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार भी जेल से छूटने के बाद भाषण दे चुके हैं.

दिल्ली हाईकोर्ट ने जेएनयू छात्रसंघ के पदाधिकारियों को भी अगली सुनवाई में हाज़िर होने का आदेश दिया है. साथ ही प्रशासनिक भवन पर प्रदर्शन करने के कारणों को स्पष्ट करने को कहा है. अदालत का यह भी मानना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच की समस्या को संवाद और सलाह के सहारे हल किया जा सकता है.

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