JNU छात्र की गुमशुदगी : वीसी ने कहा, छात्रों ने हमारी पत्नियों को भी मिलने नहीं दिया

दिल्ली के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र नजीब अहमद की गुमशुदगी के मामले में आंदोलनकारी छात्रों ने वीसी और अन्‍य अधिकारियों का घेराव करीब 24 घंटे बाद खत्म कर दिया है. छात्रों ने बुधवार शाम से ही उन्हें प्रशासनिक ब्लॉक में बंधक बनाए रखा था. वहीं पुलिस ने नजीब की सूचना के लिए 50,000 रुपये के इनाम की घोषणा की है.

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नजीब यूपी के बदायूं का रहने वाला है. छात्र के अभिभावकों से मिली शिकायत के बाद वसंत कुंज उत्तर थाना में एक व्यक्ति के अपहरण और गलत तरीके से कैद कर रखने को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई.  ‘हम इमारत के भीतर दिन में 2.30 बजे से बंद हैं. हमारे साथ एक महिला सहकर्मी भी हैं, जो अस्वस्थ हो गईं हैं, क्योंकि उनको मधुमेह है.’ दूसरी ओर, जेएनयू के छात्रों ने अपने रुख का बचाव करते हुए दावा किया कि ‘किसी को अवैध रूप से बंधक नहीं बनाया गया.’ जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष मोहित पांडेय ने कहा, इस मामले को लेकर आंदोलनकारी छात्रों ने अपना प्रदर्शन तेज करते हुए बुधवार रात कुलपति और दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों को पूरी रात प्रशासनिक ब्लॉक में बंधक बनाए रखा. विश्वविद्यालय के कुलपति एम जगदीश कुमार ने इसकी जानकारी देते हुए बताया था, जेएनयू में इस मामले को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन की वजह से पिछले तीन दिनों से कक्षाएं बाधित हैं. ‘जेएनयू प्रशासन ने प्रॉक्टर स्तरीय जांच समिति के समक्ष गवाही के लिए 12 छात्रों को तलब किया था, जिनके नाम माही-मांडवी हॉस्टल में 14 अक्टूबर को हुई हिंसा की घटना से जुड़े हैं’ गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस पूरे मामले को लेकर दिल्‍ली पुलिस कमिश्‍नर आलोक वर्मा से भी बात की है. नजीब अहमद के बारे में पुलिस को जानकारी देने वालों के लिए दिल्ली पुलिस ने 50 हजार के इनाम की घोषणा की है. साउथ डिस्ट्रिक्ट की एडिशनल डीसीपी नूपुर प्रसाद ने इसकी पुष्टि की. वहीं जेएनयू प्रशासन ने छात्र के लापता होने से संबंधित मामले में 12 छात्रों को प्रॉक्टर स्तरीय जांच समिति के समक्ष उपस्थित होने को कहा था. एक वक्तव्य में कहा गया, इस दौरान छात्रों और कुलपति के बीच दो दौर की बातचीत विफल रही. इस दौरान बीच-बीच में ‘हम सब नजीब’ के नारे सुने जाते रहे.

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