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महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग वाली याचिका खारिज, सुशांत की मौत के बाद उठी थी आवाज

नई दिल्ली: हाल ही में उद्धव सरकार के खिलाफ जाकर महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली गयी थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अगर ऐसी मांग करनी है तो राष्ट्रपति के पास जाइए। साथ ही सीजेआई ने कहा कि एक एक्टर के मौत का मतलब ये नहीं है कि राज्य में कानून व्यवस्था फेल हो गई है।

आपको बता दें याचिका में कहा गया था कि महाराष्ट्र में राज्य मशीनरी फेल हो गई है। सत्ताधारी दल अपराधियों को बचाने का काम कर रहा है। याचिका में कहा गया है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत, कंगना राणावत के घर तोड़े जाने और धमकी दिए जाने साथ ही पूर्व नेवी अधिकारी पर शिवसैनिकों द्वारा जानलेवा हमले का उदाहरण दिया गया है।

साथ ही याचिका में यह भी कहा गया है था कि अगर राज्य में राष्ट्रपति शासन नहीं भी लगाया जाता है तो कम से कम मुंबई और आस-पास की कानून व्यवस्था कुछ दिनों तक सेना के हवाले कर देनी चाहिए।

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सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एक एक्टर (सुशांत सिंह राजपूत) के मौत होने का मतलब ये नहीं है कि राज्य में कानून व्यवस्था फेल हो गई है और याचिकाकर्ता ने जो भी उदाहरण दिए हैं सब मुंबई के हैं। साथ ही सीजेआई (CJI) एस ए बोबडे ने याचिकाकर्ता से कहा एक नागरिक के रूप में आप राष्ट्रपति से संपर्क करने के लिए स्वतंत्र हैं, यहां मत आइए। अगर ऐसी मांग करनी है तो राष्ट्रपति के पास जाइए।

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