राजस्थान सरकार ने की “पायलट प्रोजक्ट” योजना की शुरुआत, जानें इसकी खासियत

जोधपुर। राजस्थान सरकार ने ग्रामीण एवं पंचायती राज विभाग व राजस्व विभाग गांवों की रिहाइशी संपत्ति का ड्रोन से सर्वे कर डिजिटल मानचित्र तैयार करवाने का बेहद अहम फैसला लिया है। सरकार ने जिसकी जमीन उसका पट्टा में स्वामित्व योजना शुरू की है। वहीं, यह इस साल पायलट प्रोजक्ट बताया जा रहा है। इस पायलट प्रोजक्ट के तहत प्रदेश के एक लाख गांवों में यह काम होना है। प्रथम चरण में राजस्थान के जैसलमेर जिले का चयन कर ग्रामीण एवं पंचायती राज विभाग व राजस्व विभाग सर्वे की तैयारियों में जुट गया है। इसके लिए राज्य सरकार ने जिला कलेक्टर एवं जिला परिषद के सीईओ को क्रियान्वयन से संबंधित दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। इस योजना के तहत सबसे पहले गांव की आबादी के रास्ते के आसपास चूने की लाइन बनाई जाएगी। इसके बाद ड्रोन से गांवों की आबादी, रिहाइशी इलाकों की हाई रिजोल्यूशन 2 डी तस्वीर खिंचेगी। तस्वीर में मकान की पैमाइश आ जाएगी।

इसके आधार पर राजस्व विभाग मकानों का नंबर देगा। साथ ही मकान मालिक को प्रॉपर्टी कार्ड जारी किया जाएगा। अभी तक राजस्व नियमों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे यह साबित हो कि गांव के अंदर किसकी कौनसी जमीन है। इस योजना में नक्शे बनाने का काम सर्वे आफ इंडिया करेगा। राजस्व विभाग और पंचायती राज विभाग इसमें सहयोग करेंगे। अत्याधुनिक एचडी तस्वीरों में गांव के हर घर का एक एक मेजरमेंट रहेगा जिसमें टोटल एरिया, कवर्ड एरिया सब कुछ आ जाएगा। इसके बाद बड़े मैप बनाने की जरूरत नहीं होगी। इन्हीं से बड़े नक्शे बनाए जा सकेंगे। मकानों के नक्शों के आधार पर सरकार मालिकाना हक के कागजात बनाएगी। सरकार गांव में नाली का प्लान करना चाहे या पाइपलाइन डालना चाहे तो जमीन की ऊंचाई निचाई भी इसमें दिखाई जाएगी।

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साथ ही गलियों तक का ब्योरा इस डिजिटल मैप में होगा। ड्रोन सर्वे के दौरान ड्रोन उड़ाने वाली टीम के साथ राजस्व विभाग और ग्राम पंचायत के कर्मचारी रहेंगे और जरूरत पड़ने पर पुलिसकर्मी भी रहेगा। सर्वे हो जाने के बाद राज्य का राजस्व विभाग और पंचायती राज विभाग मालिकाना हक की वैधानिकता जांचने के लिए अधिसूचना जारी करेगा। आपत्तियां आएंगी उनका निस्तारण राजस्व विभाग जांच अधिकारी करेगा। संपत्तियों के सत्यापन के बाद नाम बदलने संयुक्त मालिकाना हक जैसे संशोधन किए जाएंगे। जो मामले नहीं सुलझेंगे उसे जिला मजिस्ट्रेट या कलेक्टर के पास भेज दिया जाएगा।

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