शिवपाल यादव बोले- सपा में कभी नही होगा उनकी प्रसपा पार्टी का विलय

यूपी में 2017 ​के विधानसभा चुनाव की हार के बाद सपा में बंटवारा हो गया, पार्टी से शिवपाल यादव अलग हो गये और उन्होने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बना दी। लोकसभा में दोनो ही पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ीं और दोनो के लिए नतीजा निराशजनक रहा। लेकिन 2022 विधानसभा चुनाव में ये पार्टियां साथ चुनाव लड़ने जा रही है, वहीं प्रमुख शिवपाल यादव ने सपा में विलय से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी 21 दिसंबर को मेरठ के सिवालखास में विशाल रैली कर विधानसभा चुनाव अभियान की शुरुआत करेगी। वह चुनाव में रथयात्रा भी निकालेंगे और पदयात्रा भी करेंगे। उन्होंने सांसद असदुद्दीन ओवैसी व पूर्व मंत्री ओमप्रकाश राजभर की पार्टी के साथ तालमेल का संकेत दिया।

शिवपाल यादव ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने कई बार कोशिश की, समाजवादी धारा के सभी लोग एक मंच पर आएं और एक ऐसा तालमेल बनें जिसमें सभी को सम्मान मिल सके। जहां तक समाजवादी पार्टी का प्रश्न है, अब तक मेरे इस आग्रह पर पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आई है और न ही इस विषय पर मेरी समाजवादी पार्टी के नेतृत्व से कोई बात हुई है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मेरी मंशा स्पष्ट होने के बावजूद बात आगे नहीं बढ़ पा रही है ।

प्रसपा का स्वतंत्र अस्तित्व बना रहेगा और पार्टी विलय जैसे एकाकी विचार को एक सिरे से खारिज करती है और अपने पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को यह विश्वास दिलाती है कि उनके सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। शिवपाल ने कहा कि जहां तक मंत्री पद की बात है,वह पहले भी कई बार रह चुके हैं। विदित हो कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा था कि प्रसपा को एक सीट पर सरकार बनने पर एक मंत्री पद दिया जाएगा।

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24 दिसंबर से गांव गांव पदयात्रा

शिवपाल यादव ने कहा कि 24 दिसम्बर से प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश में गांव-गांव पद यात्रा अभियान चलाएगी। भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने गांव, गरीब, किसान, पिछड़े, दलित, व्यवसायी, मध्यवर्ग और युवाओं को सिर्फ छला है। सरकार शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान, रोजगार और इलाज उपलब्ध करा पाने में पूर्णतया नाकामयाब रही है। कृषि कानून के जरिये केंद्र सरकार कृषि का पश्चिमी मॉडल हमारे किसानों पर थोपना चाहती है लेकिन सरकार यह बात भूल जाती है कि हमारे किसानों की तुलना विदेशी किसानों से नहीं हो सकती क्योंकि हमारे यहां भूमि-जनसंख्या अनुपात पश्चिमी देशों से अलग है।

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