STF के हाथ लगा फर्जी शिक्षक, बीते 37 वर्षों से बेसिक शिक्षा विभाग में कर रहा था नौकरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स के हाथ एक ऐसा शख्स लगा है जो बीते 37 वर्षों से बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी दस्तावेज बनवाकर शिक्षक की नौकरी कर रहा था। एसटीएफ ने लखीमपुर से उस जालसाज को गिरफ्तार किया है।

बेसिक शिक्षा विभाग, उ0प्र0 में फर्जी अध्यापको के नियुक्ति की सूचना एस0टी0एफ को लगातार प्राप्त हो रही थी। इस सम्बन्ध में एसटीएफ की विभिन्न टीमों एवं इकाईयों को सर्तक किया गया था। अमित कुमार नागर, पुलिस उपाधीक्षक, एसटीएफ के पर्यवेक्षण में लगातार जांच पड़ताल चल रही थी। तभी पता चला कि पतिराम सिंह पुत्र स्व0 नारायण सिंह, जो फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर प्रधानाध्यापक के पद पर प्राथमिक विद्यालय, खखरा मिर्जापुर, लखीमपुर खीरी में नियुक्त था, जिसके विरूद्ध लगभग 06 माह पूर्व सेवानिवृत्ति के दिन ही जालसाजी समेत कई धाराओं में थाना फरधान, लखीमपुर खीरी पर मुकदमा पंजीकृत कराया गया था और उसे बर्खास्त कर दिया गया था। पतिराम सिंह पुत्र स्व0 नारायण सिंह तभी से फरार चल रहा था जिसके विरूद्ध न्यायालय द्वारा वारण्ट भी जारी किया जा चुका था। इस दौरान लगातार पतिराम की तलाश चल रही थी और एसटीएफ की टीम द्वारा काफी सुबूत भीं एकत्र किये गये जिसमें पता चला कि पतिराम द्वारा अपने विरूद्ध जांच गठित होने पर जांच को धोखा देने के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद, का अपनी अंकतालिका से सम्बन्धित फर्जी सत्यापन तैयार कराकर जांचकर्ता अधिकारी को धोखा देने के उद्देश्य से भेजा गया था। जिसमें कुछ अन्य लोग इसके सम्पर्क में आये थे। इन्हीं लोगों पर सर्विलांस की मदद से कार्य करने पर पतिराम के विषय में जानकारी प्राप्त हुई। वहीं आज दिनांक मनोज कुमार पाण्डेय एसटीएफ, उ0प्र0 ने अपनी टीम के एल0आर0पी0 चैराहा, लखीमपुर खीरी से वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया।

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पूछताछ के दौरान फर्जी प्रधानाध्यापक/वांछित अभियुक्त पतिराम ने बताया कि वह उसके पिता मूलरूप से जनपद गाजीपुर के निवासी थे, पिता द्वारा ही जनपद आजमगढ़ निवासी नखड़ू यादव नाम के शिक्षक के माध्यम से वर्ष-1972 में हाई स्कूल की फर्जी मार्कसीट बनवायी गयी थी। जिसके आधार पर वह प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक के पद पर नियुक्त हो गया था और लगभग 37 वर्षो तक निरन्तर नौकरी करता रहा। सेवानिवृत्ति के दिन जब उसके विरूद्ध अभियोग पंजीकृत कराकर बर्खास्त कर दिया गया तो वह फरार हो गया और अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए वह न तो मोबाइल फोन इस्तेमाल करता था और नही अपने किसी परिचत या रिस्तेदारों से किसी माध्यम से बात करता था, न ही किसी के यहाॅ मिलने-जुलने जाता था।

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