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सुप्रीम कोर्ट: बिहार में शराबंदी कानून को रद्द किए जाने का मामला…

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बिहार में शराबंदी कानून को रद्द किए जाने के मामले में पटना हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. बिहार सरकार की याचिका पर शराब कंपनियों को नोटिस जारी कर कोर्ट ने जवाब मांगा है.

सुप्रीम कोर्ट ने शराब पीने एवं उसकी बिक्री पर प्रतिबंध संबंधी बिहार के कानून को दरकिनार करने के पटना हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई. हाईकोर्ट ने जिन शराब निर्माताओं की याचिका पर प्रतिबंध कानून को दरकिनार किया था, सुप्रीम कोर्ट ने उन शराब निर्माताओं समेत सभी प्रतिवादियों से जवाब मांगा.
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बता दें कि बिहार सरकार के शराबबंदी कानून को पटना हाईकोर्ट ने 30 सितम्बर को गैरकानूनी घोषित किया था. बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी थी. बिहार में शराबबंदी कानून को इसी साल अप्रैल में लागू किया था. हालांकि हाईकोर्ट के शराबबंदी कानून को रद्द करने का कोई खास फायदा जनता को नहीं मिला.
उल्लेखनीय है कि आज बिहार में शराब बंदी कानून को रद्द किए जाने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. बिहार सरकार ने 30 सितंबर के पटना हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. बिहार सरकार की याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट के शराबबंदी कानून को रद्द करने से बिहार सरकार की शराबबंदी की मुहिम को झटका लगा.
2 अक्टूबर यानि गांधी जयंती के दिन ही बिहार सरकार शराबबंदी का नया कानून लागू कर दिया है. इस कानून के प्रावधानों मे ‘घर में शराब पीने या बरामद होने पर परिवार के सभी व्यस्क लोगों को जेल’ और कानून का लगातार उल्लंघन करते रहने पर ‘पूरे गांव या शहर पर सामूहिक जुर्माना’ आदि शामिल हैं.
हाईकोर्ट में एक जज मानते हैं कि शराब पीना मौलिक अधिकार के तहत है जबकि बेंच में शामिल चीफ जस्टिस के विचार इससे अलग हैं. बिहार में शराबबंदी कानून जनहित में है और इसे समाज के बड़े तबके खासतौर पर महिलाओं ने सराहा है क्योंकि शराब की वजह से उनकी घर की आमदनी जाती रही, कर्ज हो गया और घरवालों के स्वास्थ्य तबाह हो गए.

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