लालू को फंसाने वाले डिप्टी CM मोदी खुद फंसे, फर्जी सर्टिफिकेट से पत्नी को बना दिया प्रोफेसर

मोदी सरकार डिग्रियों के फर्जीवाड़े पर हमेशा से विपक्ष पर हमला करती रही है। लेकिन इस बार दूसरों पर हमला करने वाली भाजपा इसके घेरे में आ गई है। ताजा मामला जुड़ा है बिहार के डिप्टी सीएम और भाजपा नेता सुशील मोदी से जिन पर फर्जी ‌डिग्री के जरिए कॉलेज में प्रोफेसर पद पाने का आरोप लगा है।

दरअसल बात उस समय की है जब बिहार के स्वास्‍थ्य मंत्री रामधनी सिंह की बेटी को फर्जी कागजातों के जरिए सरकारी अस्पताल में ग्रेड 3 की नौकरी पाने के आरोपों के बाद उन्हें इस्तीफा तक देना पड़ा था। कुछ दिन पहले ही यह आरोप बीजेपी  के नेताओं ने लगाए थे। जिसके बाद भाजपा नेता सुशील मोदी ने भी स्वास्‍थ्य मंत्री से अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की ‌थी।

बिहार के स्वास्‍थ्य मंत्री और वरिष्‍ठ जेडीयू नेता  रामधनी ‌स‌िंह ने आरोप लगाया है कि बीजेपी नेता सुशील मोदी की पत्‍नी को फर्जी डिग्रियों के जरिए गर्वनमेंट डिग्री कालेज में प्रोफेसर की नौकरी दी गई है। पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी की पत्‍नी जेसू जार्ज पटना के गर्वनमेंट डिग्री कालेज में प्रोफेसर हैं। सिंह ने आरोप लगाया है कि उन्होंने फर्जी डिग्री के जरिए कॉलेज के  प्रोफेसर पद तक पहुंची हैं।

उनका कहना है कि विजीलेंस के सूत्रों के अनुसार मोदी की पत्‍नी को नौकरी फर्जी कागजातों की वजह से ही मिली है। मामले की जांच में पहले ही काफी देरी हो चुकी है। उनका कहना है कि उनकी पत्नी को नौकरी तब मिली जब वे बिहार में विपक्ष के नेता थे। जबकि साल 2002 में विजीलेंस के पुलिस अधीक्षक अजय कुमार वर्मा ने आयोग के अध्यक्ष यू पंजैर को लिखा था कि जब वह जार्ज की नियुक्ति के फर्जी दस्तावेजों को साबित करने ही वाले थे कि तब उन्हें हटा लिया गया।

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रामधनी सिंह ने पलटवार करते हुए सुशील मोदी की पत्नी जेसू जार्ज पर ही फर्जी डिग्री से नौकरी पाने के आरोप लगा दिए। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही इस संबंध में सबूत वो मीडिया को देंगे। सासाराम में रामधनी सिंह ने बताया कि मोदी की पत्नी का मामला पहले से ही विजीलेंस के पास है जो 90 के दशक के लेक्चरर घोटाले की जांच कर रही है। सिंह दावा किया कि मोदी लोगों के सामने ईमानदार होने का दावा करते हैं लेकिन जल्द ही वे उनका चेहरा बेनकाब करेंगे।

बता दें कि जेसू जार्ज का नाम उन लोगों में शामिल था। जिनकी विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग से ग्रांट पाने वाले कालेजों में फर्जी नियुक्तियों की जांच की जा रही थी। उनके राजा राम मोहन राय कालेज ऑफ एजुकेशन से मिले अनुभव प्रमाण पत्र को कथित तौर पर फर्जी बताया गया था। वर्मा के पत्र के अनुसार जिन सर्टिफिकेट से उनका कॉलेज में शिक्षण का साल 1988 से 1992 तक का अनुभव दिखाया गया जबकि बीएड कॉलेज 1987 से 1989 तक संचालित हुआ।

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