UA-128663252-1

11वीं के छात्र ने पेश की इंसानियत की मिसाल, जिद करके कराया घोड़े का इलाज

लखनऊ। आज के दौर में हर कोई अपने दर्द और अपनी समस्या से परेशान है। यहां तक कि लोग अपने परिचितों और रिश्तेदारों तक की सुध नहीं ले रहे हैं। ऐसे में एक बच्चा ऐसा भी जिसे असहाय और बेज़ुबानों के दर्द से भी पीड़ा होती है। इस छात्र ने एक बेज़ुबान की तकलीफ़ को देखकर उसके इलाज का बीड़ा उठाया। उसने अपने ​पिता की मदद बेजुबान को इलाज मुहैया कराया। इस बच्चे के प्रयास ने लाखों लोगों को मानव धर्म की शिक्षा दी।

लखनऊ के पीजीआई क्षेत्र में रहने वाले 11वीं कक्षा के छात्र रत्नेश प्रताप सिंह सुबह टहलने निकले थे। इसी दौरान रत्नेश की नज़र वृंदावन सेक्टर 14 के पास एक बीमार घोड़े पर पड़ी। घोड़े के आगे से पीछे तक पैरों में पुरानी रस्सी बंधी थी और उसका पैर सड़ रहा था। घोड़ा नाले में फंसा हुआ था। कुछ देर में ही उसकी जान जा सकती थी। रत्नेश ने घर जाकर पीजीआई फायर स्टेशन में सिपाही अपने पिता सुशील सिंह को सारी बात बताई।

Gyan Dairy

इसके बाद पिता और पुत्र सीधे घोड़े के पास पहुंचे। बीमार घोड़ा नाले में फंसा हुआ था। यह देख सुशील सिंह ने स्थानीय समाजसेवी ताराचंद यादव को फोन किया, इसके साथ ही फायर ब्रिगेड टीम व डॉक्टर को भी सूचना दी गई। इन सबकी मदद से घोड़े को नाले से निकाला गया। इसके बाद उसके पैर की रस्सी काटकर उसका इलाज किया गया। प्राथमिक उपचार के बाद घोड़े को चलने-फिरने के लिए खुले में छोड़ा गया।

Share