इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश, बच्‍चे की बीमारी अंतर जनपदीय तबादले का पर्याप्त आधार

नई दिल्ली। यूपी में प्राथमिक स्कूलों में शिक्षको के अंतर जनपदीय तबादलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चे की बीमारी अध्यापिका के अंतर जनदीय तबादले का वैध आधार है। एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चे की बीमारी एक संवेदनशील मामला है। तबादले के समय इस पर विचार न करना गलत है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अजय भनोट ने ये आदेश जनपद प्रयागराज की सहायक अध्यापिका सईदा रुखसार मरियम रिजवी की याचिका पर दिया है। इस आदेश से पहले सिर्फ पति या पत्नी की बीमारी पर ही अंतर जनपदीय तबादले की मांग की जा सकती थी।

सहायक अध्यापिका सईदा रुखसार मरियम रिजवी की अधिवक्ता नवीन शर्मा ने कोर्ट को बताया कि याची का साढ़े पांच वर्ष का बेटा अस्थमा से पीड़ित है। बच्चे की बीमारी का स्तर 80 प्रतिशत तक है। सहायक अध्यापिका सईदा रुखसार मरियम रिजवी के पति लखनऊ में बिजली विभाग में इंजीनियर हैं। याची ने बेटे की बीमारी का हवाला देकर अंतर जनदीय तबादले की मांग की थी लेकिन उसका आवेदन बिना कोई कारण बताए निरस्त कर दिया गया। याची के अधिवक्ता का तर्क था कि स्थानांतरण संबंधी प्रत्यावेदन रद्द करते समय सेवा नियमावली और दो दिसंबर 2019 के शासनादेश का ध्यान नहीं रखा गया।

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हाईकोर्ट का कहना था कि अध्यापक सेवा नियमावली के नियम 8(2)(डी) का उद्देश्य महिला के हितों की रक्षा करना है। इसलिए महिला को उस स्थान पर नियुक्ति दी जानी चाहिए, जहां उसका पति कार्यरत है। सेवा नियमावली में बच्चे की बीमारी का कोई जिक्र नहीं है लेकिन यह अक्षम व्यक्तियों का अधिकार अधिनियम 2016 में दिया गया है। दो दिसंबर 2019 का शासनादेश इसी अधिनियम के आधार पर जारी किया गया है। कोर्ट ने अंतर जनपदीय स्थानांतरण न देने के 27 फरवरी 2020 के आदेश को रद्द करते हुए बेसिक शिक्षा परिषद को एक माह के भीतर याची के स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।

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