चला गया बुलंदियों वाला शायर अशोक साहिल, लम्बी बीमारी के बाद निधन 

नई दिल्ली। यूपी के मुजफ्फरनगर में सोमवार को नामचीन शायर अशोक कुमार भगत उर्फ अशोक साहिल का बीमारी के चलते निधन हो गया। अशोक साहिल लम्बे समय से गुर्दे के संक्रमण से जूझ रहे थे। सोमवार सुबह अचानक स्वास्थ्य ​खराब होेने पर परिजन उन्हें मेरठ के एक अस्पताल ले गए, जहां उनका निधन हो गया। उनके निधन की जानकारी पाकर शायरों और कवियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।  उनका अंतिम संस्कार शुक्रताल स्थित श्मशान घाट पर सम्पन्न हुआ। मुखाग्नि उनके दत्तक पुत्र योगेश शर्मा ने दी। उनके परिवार में अलावा परिवार में तीन पुत्रियां अकांक्षा भगत, शिवानी भगत और प्रियम भगत हैं।

अशोक साहिल ने वैसे तो बहुत सारी कविताएं लिखीं लेकिन उनका प्रसिद्धि इन पंक्तियों से मिली।

नज़र नज़र में उतरना कमाल होता है।

नफ़स नफ़स में बिखरना कमाल होता है।।

बुलंदियों पे पहुंचना कोई कमाल नहीं।

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बुलंदियों पे ठहरना कमाल होता है।।  

 

इसके साथ ही अपनी दर्दभरी शायरी से देशभर में अलग पहचान बनाने वाले अशोक साहिल की निजी जिंदगी भी दर्द भरी ही रही। तीन साल पहले अशोक साहिल की पत्नी शोभा भगत का निधन हो गया था।शोभा भगत जिला अस्पताल में हेड सिस्टर थीं।

अशोक साहिल का परिवार बंटवारे के बाद पाकिस्तान के भावलपुर से आकर पंजाब में बसे थे। अशोक साहिल करीब 40 साल से मुजफ्फरनगर में रह रहे थे। इस दौरान उन्होंने खतौली में कपड़ों का भी काम किया। उनकी पत्नी आशा भगत एएनएम थीं। वे परिवार के साथ जिला चिकित्सालय परिसर में मिले आवास में रहती थीं। दो साल पहले कैंसर से उनका निधन हो गया था। तभी से अशोक साहिल भी बीमार रहने लगे थे। किडनी फेल होने के कारण वह डायलिसिस पर थे। बीते डेढ़ साल से बड़ी बेटी आकांक्षा भगत के पास ग्रेटर नोएडा में रह रहे थे। उनके दामाद तरुण जोशी ने बताया कि कुछ दिनों से हालत बिगड़ने पर उन्हें मेरठ के सुशीला जसवंत राय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां सोमवार को उनका निधन हो गया।

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