अयोध्या: विद्वानों की आपत्ति के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लोगो में हुआ सुधार, रामो विग्रहवान धर्म: है मूल आधार

नई दिल्ली। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो चुका है। मंदिर निर्माण के लिए गठित श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट लॉकडाउन के बावजूद मर्याद पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के दिव्य मंदिर के निर्माण के लिए आवश्यक कार्य कर रहा है। अब श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का आधिकारिक लोगो सामने आया है। यह लोगो तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मूल्यों और आदर्शों का परिचायक है। हालांकि विद्वानों की आपत्ति के बाद लोगो में आंशिक सुधार किया गया है।

इस लोगो के केंद्र में भक्त वत्सल, करुणानिधान भगवान राम का दिव्य चित्र अंकित है। वहीं वलयाकार ऊपरी परिधि पर श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अंकित है। यह लोगो को उसकी वास्तविक पहचान प्रदान करता है। लोगो में अंकित तीर्थ क्षेत्र के नाम से पूर्व और नाम के समापन पर श्रद्धावनत हनुमान जी का चित्र संयोजित है। भक्त शिरोमणि हनुमान जी का चित्र यह बताता है कि तीर्थ क्षेत्र नख से शिख तक हनुमान जी को ही अपना मार्गदर्शक मानते हुए कार्य सम्पन्न करेगा।

लोगो के निचले भाग में वाल्मीकि रामायण की यह प्रतिनिधि अर्धावली अंकित है, रामो विग्रहवान धर्म:। इस पंक्ति से भगवान राम के अप्रतिम वैशिष्ट्य का मर्म परिलक्षित है और वाल्मीकीय रामायण के अरण्य कांड का यह पूरा श्लोक इस प्रकार है, रामो विग्रहवान धर्म:, साधु: सत्य पराक्रम:, राजा सर्वस्य लोकस्य, देवानामिव वासव:। यह श्लोक तब का है, जब रावण राम को दोषी ठहराते हुए मारीच से सीता के अपहरण में सहायता चाहता है। सहायता देने से पूर्व मारीच रावण को भला-बुरा कहता है और इस श्लोक में मारीच राम का वैशिष्टय बयां करता है। यह सच्चाई श्लोक की शाब्दिक व्याख्या से स्वत: परिभाषित है। इसके अनुसार श्री राम धर्म के मूर्तिमान स्वरूप हैं। वे साधु और सत्य पराक्रमी हैं। जैसे इंद्र समस्त देवताओं के अधिपति हैं, उसी तरह श्री राम भी संपूर्ण जगत के राजा हैं।

 

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यह था पुराना लोगो

 

श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के लोगो में हुआ यह सुधार

दरअसल, श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का लोगो बनाने में चूक हो गयी थी। लोगो में रामो विग्रहवान धर्म: लिखने में गलती हो गयी थी। विग्रहवान में न पर हलंत नहीं लगाया गया था। ट्रस्ट के लोगो में अब सुधार कर दिया गया है। श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के लोगो पर काशी के विद्वानों को आपत्ति थी। लोगो में नीचे लिखे ‘रामो विग्रहवान धर्म:’ में अशुद्धि बताई गयी। विद्वानों के अनुसार, विग्रहवान में हलंत न होने से अर्थ का अनर्थ हो रहा है। हलंत न होने से अर्थ हो रहा कि राम अधर्म के विग्रह हैं। इसे तत्काल सुधार कर नया लोगो जारी करने की मांग की गई थी। काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर राम यत्न शुक्ल, राम नारायण द्विवेदी, ब्रजभूषण ओझा, रमाकान्त पाण्डेय और शिव जी उपाध्याय ने इस पर आपत्ति जताई थी। ट्रस्ट ने विद्वानों की आपत्ति को गंभीरता से लेते हुए लोगों में संशोधन कर नए सिरे से जारी कर दिया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव और विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने काशी के विद्वानों की ओर से ट्रस्ट के लोगो के संबंध में जताई गई आपत्ति पर क्षमा मांगी है। उन्होंने ट्रस्ट के लोगो में आंशिक त्रुटि को स्वीकार करते हुए इसमें सुधार भी कर दिया है।

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