मुख्यमंत्री पद की छोड़िए…कौन-कौन बन रहा है मंत्री, जानिए उनके नाम!

लखनऊ : भले ही प्रदेश में भाजपा ने मुख्यमंत्री पद के लिए किसी का नाम अभी तय न किया हो, लेकिन पार्टी विधायकों ने मंत्री पद के लिए लामबंदी शुरू कर दी है। जनता ने भाजपा को जितनी बड़ी संख्या में विधायक देकर मजबूत सरकार की नींव रखी है, अब वही विधायक मंत्री पद की चाहत पूरी करने में जुट गए हैं। भाजपा ही नहीं, बल्कि उसके सहयोगी अपना दल और भारतीय समाज पार्टी से जीते विधायक भी मंत्री पद की चाहत में पीछे नहीं हैं। इसके लिए विधायकों ने होली के बहाने लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय से लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दफ्तर तक चक्कर लगाने शुरू कर दिए हैं। कुछ तो दिल्ली भी पुंचकर लामबंदी कर रहे हैं। करीब 14 साल के वनवास के बाद हुई वापसी में कई पुराने चेहरे भी लालबत्ती की वापसी की कोशिश में हैं।

यह विधायक बन सकते हैं मंत्री :

जिन लोगों के मंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है, उनमें बरेली के राजेश अग्रवाल, कानपुर के सतीश महाना, शाहजहांपुर के सुरेश खन्ना, गोरखपुर के डॉ. राधामोहन दास अरवाल, आंवला से धर्मपाल सिंह, पूर्व एमएलसी स्वतंत्रदेव सिंह, एमएलसी महेंद्र सिंह और बसपा से भाजपा में आए स्वामी प्रसाद मौर्य शामिल हैं। इसी तरह मुजफ्फरनगर से जीते अवतार सिंह भड़ाना, मथुरा से जीते श्रीकांत शर्मा, बाराबंकी से जीते बैजनाथ रावत, प्रदेश महामंत्री विद्याशंकर सोनकर, नोएडा से विधायक चुने गए पंकज वसंह, लखनऊ से आशुतोष टंडन, डॉ. रीता बहुगुणा जोशी, औराई से दीनानाथ भाष्कर, घोसी से फागू चौहान, काशी से रवींद्र जायसवाल, थाना भवन से सुरेश राणा, पू्र्व मंत्री वीरेंद्र सिंह सिरोही, एमएलसी भूपेंद्र सिंह, रालोद से आए ठाकुर दलवीर सिंह, आगरा से योगेंद्र उपाध्याय या रानी पक्षालिका सिंह, अमेठी से गरिमा सिंह और सरोजनी नगर से विधायक बनीं स्वाति सिंह के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं। इसके अलावा मुख्तार के बड़े भाई सिगबतुल्ला अंसारी को हराकर जीती दिवंगत कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय, इलाहाबाद से सिद्धार्थनाथ सिंह, सहयोगी दलों भासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर व अपना दल के विधायक नीलरतन पटेल भी मंत्री बन सकते हैं।

20 से 30 मंत्री ले सकते हैं शपथ :

नई सरकार के शपथ ग्रहण की अभी तारीख तय नहीं है, लेकिन कहा जा रहा है कि पहले चरण में 20 से 30 मंत्री सीएम के साथ शपथ ले सकते हैं। सूत्रों की मानें तो पार्टी के मुख्य प्रवक्ता व भगवंतनगर सीट से जीते हृदय नारायण दीक्षित को मंत्रिपरिषद में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। चर्चा यह भी है कि उन्हें विधानसभा का अध्यक्ष बनाया जाएगा। लेकिन सूत्रों के मुताबिक विधानसभा अध्यक्ष किसी और को बनाकर दीक्षित को संसदीय कार्यमंत्री का दायित्व देकर सदन संभालने की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। विधानसभा अध्यक्ष के लिए कई वरिष्ठ विधायकों के नाम सेमने आ रहे हैं।

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कई जातियों पर फोकस :

मंत्रिमंडल में अति पिछड़ी जातियों मोर्य, पासी, लोध व अन्य जातियों के विधायक ज्यादा जगह पाएंगे। वहीं ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य, कायस्थ, जाट जाति के विधायक भी मंत्री बनाए जाएंगे। दलित वर्ग में जाटव विधायक के साथ कोरी, वाल्मीकि जाति से भी मंत्री बनाए जा सकते हैं।

हाईकमान करेगा फैसला :

पार्टी सूत्रों के मुताबिक यूपी का सीएम ही नहीं, बल्कि उनकी टीम का फैसला पीएम मोदी व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह करेंगे। इसमें जगह बनाने के लिए ईमानदार छवि व शिक्षा के अलावा यह भी देखा जाएगा कि कौन से विधायक किस विभाग में अच्छा काम कर सकते हैं। पार्टी 2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर सरकार का गठन करेगी। ऐसे में मंत्री वही बनेंगे जो अपने विभाग के जरिए केंद्र व राज्य सरकार को अच्छे रिजल्ट दे सकें।

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