कोरोना संकट: आगरा मेयर का आरोप, अधिकारी कर रहे कालाबजारी, CM से गुहार ‘मेरे शहर को बचा लो’

आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में लगातार कोरोना के केस बढ़ते चले जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर आगरा को चीन के वुहान का नाम दिया जा रहा है, सरकार से लेकर आगरा का प्रशासन लगातार इससे निपटने की कोशिश कर रहा है। वहीं ऐसे में आगरा के मेयर का अधिकारियों पर संगीन आरोप लगाना सरकार की कार्यशैली पर बड़ा सवाल उठा रहा है। कोरोना वायरस संक्रमण के प्रकोप से चिंतित होकर शहर के पहले नागरिक यानि मेयर नवीन जैन ने सूबे के मुखिया से शहर को बचाने की गुहार लगाई है। आगरा में संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 358 पहुंच चुका है और आठ संक्रमितों की अब तक मौत हो चुकी है। लेकिन अब तक शहर के किसी भी जन प्रतिनिधि ने इस विकराल होती समस्‍या को जल्‍द काबू में करने के लिए सार्थक पहल नहीं की है।

पहली बार मेयर ने कदम बढ़ाते हुए प्रशासन के खिलाफ जाकर मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ को पत्र लिखा है। एक प्रति उन्‍होंने उपमुख्‍यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा को भी भेजी है। पत्र में उन्‍होंने जिला प्रशासन के खिलाफ बेहद सख्‍त लहजे का प्रयोग किया है। इस बाबत उन्‍होंने एक वीडियो जारी कर शहरवासियों से इसकी जानकारी भी साझा की है। साथ ही वीडियो में शहर के लोगों से मुश्किल हालातों में धैर्य रखने और लॉकडाउन का पालन करने की अपील भी की है।

मेयर ने अपने पत्र में लिखा है कि ‘सेवा में, मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ जी, मान्‍यवर सादर प्रणाम, अवगत कराना है कि आगरा शहर में वैश्विक महामारी कोरोना के मरीजों की संख्‍या 313 तक पहुंच चुकी है। आशंका है कि यदि उचित प्रबंधन नहीं हुआ तो इस संख्‍या में काफी बढ़ोत्‍तरी हो सकती है और आगरा देश का वुहान बन सकता है। स्थिति को नियंत्रित करने में स्‍थानीय प्रशासन नकारा साबित हुआ है। स्‍थानीय प्रशासन द्वारा हॉट स्‍पॉट क्षेत्र में बनाए गए क्‍वारंटाइन सेंटर्स में कई कई दिनों तक जांच नहीं हो पा रही है। और न ही वहां मरीजों के लिए भोजन एवं पानी का उचित प्रबंधन किया जा रहा है। सरकारी अस्‍पताल में कोरोना मरीजों को छोड़कर अन्‍य मरीजों को भी नहीं देखा जा रहा है। स्थिति विस्‍फोटक हो चुकी है। डायलिसिस, अन्‍य जांचेंं व समुचित उपचार न होने के कारण मरीज मर रहे हैं। जिसका उदाहरण सिकंदरा निवासी आरबी सिंह पुंढीर हैं। दवाएं न मिलने के कारण लोग परेशान हैं। प्राइवेट हॉस्पिटल बंद हैंं और जो मरीज गंभीर बीमारियों से ग्रस्‍त हैं उनका उपचार भी नहीं हो पा रहा है। प्राइवेट हॉस्पिटलों के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की जा रही है। धरातल पर कोई कार्य नहीं हो रहा है। लॉकडाउन में आवश्‍यक सेवाएं, खाद्य एवं रसद सामग्री के डोर स्‍टेप डिलीवरी के दावे तो किये गए किंतु ये सभी आवश्‍यक वस्‍तुएं जन सामान्‍य तक समुचित ढंग से नहीं पहुंच पा रही हैं। जहां कहीं उपलब्‍ध हैं तो वहां जमकर काला बाजारी हो रही है। आगरा के मुख्‍य चिकित्‍सा अधिकारी भी जिला अस्‍पताल की व्‍यवसथाओं को नहीं संभाल पा रहे हैं। वरिष्‍ठ अधिकारी अपने घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। केवल 15- 20 मिनट के लिए फोटोग्राफी कराने के उद्देश्य से बाहर निकलते हैं। जिससे रिकॉर्ड रखा जा सके। इन क्रिया कलापों की वजह से आम जनमानस भाजपा की सरकार एवं जनपव्रतिनिधियों को कोस रही है। तथा आम जनमानस में काफी आक्रोश व्‍याप्‍त है। स्‍थानीय प्रशासन पंगु बना हुआ है, जिसके कारण सरकार की छवि धूमिल हो रही है।

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मैं बहुत दुखी मन से आपको पत्र लिख रहा हूं। मेरा आगरा अत्‍याधिक संकट के दौर से गुजर रहा है। आगरा को बचाने के लिए कड़े निर्णय लेने की आवश्‍यकता है। स्थिति अत्‍याधिक गंभीर हो चुकी है, इसलिए मैं आपसे हाथ जोड़कर प्रर्थना कर रहा हूं कि मेरे आगरा को बचा लीजिए, बचा लीजिए।

अत: महोदय से अनुरोध है कि उपरोक्‍त तथ्‍यों को ध्‍यान में रखते हुए आवश्‍यक कार्रवाई कराने की कृपा करें। जिससे आगरा शहर की जनता राहत की सांस ले सके।

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