लखनऊ सहित प्रदेश के कई जिले बन गये हैं आतंकियों के गढ

लगता है कि पिछले लगभग डेढ दशक से राजधानी लखनऊ पाक समर्थित आतंकियों का गढ बनता जा रहा है। हालत यह है कि कानपुर, मुरादाबाद, मेरठ, अलीगढ, मऊ, आजमगढ, इलाहाबाद, बहराइच, गोंडा, देवरिया तथा महराजगंज  सहित प्रदेश के कई जिलों में आतंकियों ने अपने पैर अच्छी तरह से जमा लिये हैं। इसी 13 मई को एस.एस.बी. द्वारा सोनौली के बार्डर पर गिरफ्तार हिजबुल आतंकी नसीर अहमद बानी की गिरफ्तारी से इस आशंका की पुष्टि होती है। इसी के चलते इसके पहले भी प्रदेश में कई आतंकियों की गिरफ्तारी अथवा अथवा पुलिस से उनकी मुठभेड हो चुकी है।

जानकार सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार आतंकी नसीर अहमद बानी को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की देखरेख में 14 सालों तक प्रशिक्षित किया गया था। आईएसआई ने फैसलाबाद में आतंकी प्रशिक्षण देने के बाद इसे कराची से शारजाह और काठमांडू के रास्ते सोनौली बार्डर से भारत में घुसपैठ की कोशिश की थी। लेकिन, इसकी भनक लगते ही एसएसबी ने इसकी भनक लगते ही बहुत चैकन्नी हो गयी और जबरदस्त घेराबंदी के ेबाद इसे गिरफ्तार कर लियेा।

सूत्रों का कहना है कि पाक की नापाक खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित आतंकवादियों के उत्तर प्रदेश को ही अपना गढ बनाने के इरादे की दो मुख्य वजहें हो सकती हैं। एक तो यह कि भारत और नेपाल के सीमावर्ती इलाकों से आतंकियों को घुसपैठ कराना बहुत आसान रहा है। दूसरा यह कि उत्तर प्रदेश में पिछले लगभग डेढ दशको से सपा और बसपा जैसे राजनीतिक दलों की सरकारे रही हैं। इनके लिये मुस्लिम वोटबैंक बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिये ये दोनों की सियासी दल इन आतंकवादियों के खिलाफ कडा कदम उठाने  से यथासंभव बहुत बचते रहे हैं।  आरोप है कि पूर्व मुख्य मंत्री मुलायम सिंह यादव की सरकार में तो जेल में बंद सिमी के संदिग्ध आतंकवादियों को रिहा कराने के लिये अदालत में जनहित याचिकाएं तक दायर की गयी थी। इनमें कुछ के बारे में अदालत ने यह सवाल कर दिया था कि आखिर, आतंकवादियों को जेल से रिहा कराने की कोशिश का जनहित से कैसे संबंध हो सकता है?  सरकार के इसका सही जवाब देने की स्थिति में सिमी से जुडे ऐसे आतंकवादियों को नहीं रिहा कराया जा सका था।

पुलिस की गिरफ्त में आये नसीर से हुई गहन पूछताछ के बाद कल सोनौली कोतवाली में पाकिस्तान के आतंकी संगठन चीफ आफ यूनाइटेड जेहाद काउंसिल व हिजाबुल मुजाहिदीन के कमांडर के खिलाफ भारत के प्रति आपराधिक षड्यंत्र रचने और राष्ट्रद्रोह के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इसके अलावा, अन्य चार आतंकियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गयी है। नसीर की माने, तो सैयद सलाउद्दीन के कहने पर वह कश्मीर में हिंसा भडकाने के लिये दुबई के रास्ते काठमांडू आया था। वहां से सोनौली के रास्ते से होकर वह भारत में घुसपैठ की कोशिश कर रहा था। लेकिन, इसी बीच वह पकड लिया गया।

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उल्लेखनीय है कि लखनऊ में हुई सबसे बडी आतंकी मुठभेड का खलनायक सैफुल्लाह आईएस के आकाओं की नजर में हीरो था। आईएस के इंडिया चीफ शेख मुजब्बिर का यह इस हद तक चहेता था कि वह इसे उत्तर प्रदेश में आईएस. के नये माड्यूल्स का कमांडर बनाना चाहता था। सैफुल्लाह प्रदेश में समुदायविशेष के युवाओं को आईएस का प्रचारक बना रहा था। ऐसे युवाओं का ब्रेनवाश करने के लिये यह उन्हें लैपटाप और मोबाइल पर आईएस के बारे में तमाम जानकारियां दिया करता था।

उल्लेखनीय है कि एसटीएफ ने पिछले साल इंदिरानगर में संदिग्ध आतंकी अलीम को गिरफ्तार किया था। चह लखनऊ में हेयरड्रेसर की आड में छिपकर अपने नापाक इरादे को अंजाम देने की पुरजोर कोशिश कर रहा था। इसने इसी पाॅश कालोनी के वसंत कुंज में स्थित एक मकान में लगभग आठ आतंकवादियों की बैठक की थी। इसमें हरिद्वार के अर्धकुंभ मेले में बम ब्लास्ट कर भयंकर तबाही की योजना बनाई गयी थी। इसके लिये इसी शहर से ही विस्फोट करने के सारे सामान जुटा लिये गये थे। लेकिन, ये लोग अपने नापाक इरादे में कामयाब नहीं हो सके। इनके बारे में सूचना मिलते ही पुलिस ने इन्हें दबोच लिया था।

कानपुर में पकडे गये इमरान और फैजल खान के पास से दो लैपटाप और आईएस का साहित्य बरामद किया था। इसमें बम बनाने की पूरी जानकारी दी गयी थी। इनकी योजना लखनऊ में जबरदस्त ब्लास्ट करने की थीं इटावा के रहने वाले राखी रानावत और इशू ने इन लोगों को हथियार उपलब्ध कराये थे। आईएस के लखनऊ कानपुर खरासान माड्यूल का मास्टर माइंड गौस मुहम्मद लखनऊ के ठाकुरगंज मोहल्ले में रह रहा था।

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