हिस्ट्रीशीटर हत्याकांड: पिता बोले- हत्या करने वाले उनके बेटे को कर रहे बदनाम

लखनऊ। राजधानी के पीजीआइ थाना क्षेत्र में स्थित वृंदावन कॉलोनी के सेक्टर 14 में बुधवार की सुबह हुई हिस्ट्रीशीटर दुर्गेश यादव की हत्या के मामले में उसके पिता उमाकांत ने बताया कि दुर्गेश एक सप्ताह पहले ही लखनऊ आया था। उस पर पैसे लेकर नौकरी लगवाने का आरोप पूरी तरह गलत है। हत्यारे उनके बेटे को मरने के बाद बदनाम कर रहे हैं।

दुर्गेश के पिता उमाकांत यादव ने बताया कि दुर्गेश उनका इकलौता बेटा था। परिवार में दुर्गेश के अलावा उसकी पत्नी अनीता, बेटी आर्या (5) और बेटा आरु (3) है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को उनकी फोन पर दुर्गेश से बात हुई थी। वह लखनऊ में चार साल से रह रहा था। आरोप है कि बेटे की फर्जी हिस्ट्रीशीट खोली गई थी। उन्हें हत्यारोपितों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। बेटे का काम के सिलसिले में सचिवालय में आना जाना था। पर उसने रुपए लेकर नौकरी के नाम पर ठगी की इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। इसके अलावा पोस्टमार्टम हाउस में दुर्गेश के चाचा रमाकांत यादव, चचेरा भाई रामजन्म व अन्य परिवारीजन मौजूद रहें।

यह थी घटना

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पीजीआइ थाना क्षेत्र स्थित वृंदावन कॉलोनी के सेक्टर 14 में बुधवार की सुबह एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतक दुर्गेश यादव मूल रूप से गोरखपुर के मठ भताड़ी उरुवा बाजार निवासी उमाकांत यादव का पुत्र था। दुर्गेश उरुवा थाने का हिस्ट्रीशीटर था। वह वृंदावन कॉलोनी स्थित मकान में किराये पर रह रहे दोस्त के साथ ठहरा था। आरोप है कि बुधवार सुबह खरगापुर गोमतीनगर निवासी पलक ठाकुर अपने साथी फीरोजाबाद जिले के मसीरपुर में धनापुर गांव निवासी मनीष कुमार यादव व अन्य के साथ वहां पहुंची। इन लोगों ने उसके कपड़े भी फाड़ दिए और वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। इसके बाद मारपीट करके दुर्गेश को गोली मार दी।

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