लखनऊ में माफिया मुख्तार अंसारी की अवैध इमारत जमींदोज, 68 साल से था अवैध कब्जा

लखनऊ। अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ योगी सरकार की सख्ती सड़क पर दिख रही है। गुरुवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने पूर्वांचल के माफिया मुख्तार अंसारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। एलडीए के दस्ते ने भारी तादात में पुलिस बल की मौजूदगी में पॉश इलाके हजरतगंज के डालीबाग में करीब दस हजार वर्ग फुट में बने दो बिल्डिंग को ध्वस्त कर दिया। एलडीए का दावा है कि यह बिल्डिंग शत्रु सम्पत्ति पर बनी थी। इस शत्रु सम्पत्ति को माफिया मुख्तार अंसारी ने फर्जी तरीके से पहले अपनी मां और फिर अपने दो बेटों अब्बास अंसारी व उमर अंसारी के नाम पर दर्ज करा लिया था।

एलडीए की विहित प्राधिकारी ऋतु सुहास ने इन दोनों इमारतों को 11 अगस्त को ढहाने का आदेश दिया था। गुरुवार को सुबह लगभग छह बजे एलडीए के अफसर, जिला प्रशासन व पुलिस बल के साथ बुलडोजर लेकर पहुंच गए। बताया जा रहा है यहां एक बिल्डंग में ताला बंद था। जबकि दूसरे में एक परिवार रह रहा था। उस परिवार को तत्काल घर खाली करने का फरमान सुना दिया गया।

कार्रवाई की भनक लगते ही वहां कुछ लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। एलडीए व प्रशासनिक अधिकारियों से झड़प शुरू होने लगी। लेकिन ढाई सौ से अधिक संख्या में मौजूद पुलिस बल ने उन्हें खदेड़ दिया। बुलडोजर से बिल्डिंग को गिराने की कार्रवाई शुरू हुई। कुछ ही देर में तीन मंजिला बिडिंग भरभराकर जमींदोज हो गई। कार्रवाई के बाद एलडीए व प्रशासन के अधकारी वापस चले गए। एहतियात के तौर पर वहां पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

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डालीबाग में मुख्तार अंसारी के अवैध निर्माण को ढहाया गया वह जमीन निष्क्रांत प्रापर्टी है। निष्क्रांत उन सम्पत्तियों को कहा जाता था, जिनके मालिक आजादी के बाद पाकिस्तान चले गए थे। इसके बाद वर्ष 1952 में ही दस्तावेजों में हेरफेर कर के इस जमीन का निष्क्रांत वाला ब्योरा खतौनी से हटा दिया गया। अब मामला खुला तो पता चला कि यह जमीन मोहम्मद वसीम के नाम दर्ज थी। आजादी के बाद वर्ष 1952 में वह देश छोड़कर पाकिस्तान में जा बसे। इसके बाद अधिवक्ता टीएस कालरा ने दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर निष्क्रांत सम्पत्ति वाला हिस्सा ही गायब कर दिया। इसकी जानकारी लखनऊ विकास प्राधिकरण को दी गई। टीएस कालरा ने न सिर्फ मुख्तार परिवार बल्कि कुछ अन्य परिवारों को भी मोहम्मद वसीम की सम्पत्ति बेची है। अब सभी पर धारा 33/39 के तहत कार्रवाई होगी।

निष्क्रांत और शत्रु सम्पत्ति में अंतर
वर्ष 1947 के बाद जो लोग 1954 तक देश छोड़कर चले गए उनकी सम्पत्ति को निष्क्रांत घोषित किया गया। जिले के कलेक्टर इसके कस्टोडियन होते हैं। स्वामित्व राजस्व परिषद का माना जाता है। यह सम्पत्ति उन लोगों को ही दी जा सकती थी जो बंटवारे के समय पाकिस्तान छोड़कर भारत आए थे। 1954 के बाद देश छोड़कर पाकिस्तान में बसने वालों की सम्पत्ति को शत्रु सम्पत्ति कहा गया। इसका स्वामित्व मुम्बई में बैठे शत्रु सम्पत्ति के संरक्षक के पास होता है। इसका भी कस्टोडियन कलेक्टर यानी जिले के डीएम को बनाया गया है।

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