भारत की नारी शिक्षित हो, यही महिलाओं का असल सम्मान : रोशनी लाल

स्वर्ण भारत परिवार ट्रस्ट की संरक्षक व ट्रस्टी रोशनी लाल जी ने स्वर्ण भारत परिवार द्वारा संचालित कार्यक्रम अंतराष्ट्रीय मदर टेरेसा सम्मान समारोह के समापन के सुभअवसर पर मीडिया के माध्यम से सभी चयनित महिलाओं को शुभकामनाएं दी और कहा भारत की हर महिला शिक्षित हो तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई नही रोक सकता। उन्होंने गर्न्थो पुराणों व सभी धर्मों की चर्चा करते हुए कहा स्त्री को सृष्‍टि की जननी कहा गया है –
‘स्त्री ना होती जग म्हं, सृष्टि को रचावै कौण।
ब्रह्मा विष्णु शिवजी तीनों, मन म्हं धारें बैठे मौन।
एक ब्रह्मा नैं शतरूपा रच दी, जबसे लागी सृष्टि हौण।’
अर्थात, यदि नारी नहीं होती तो सृष्टि की रचना नहीं हो सकती थी। स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश तक सृष्टि की रचना करने में असमर्थ बैठे थे। जब ब्रह्मा जी ने नारी की रचना की, तभी से सृष्टि की शुरुआत हुई।

हिंदू धर्म में देवियों की होती है पूजा
सनातन वैदिक हिन्दू धर्म में जहां पुरुष के रूप में देवता और भगवानों की पूजा-प्रार्थना होती थी वहीं देवी के रूप में मां सरस्वती, लक्ष्मी और दुर्गा का वर्णन मिलता है। वैदिक काल में नारियां मां, देवी, साध्वी, गृहिणी, पत्नी और बेटी के रूप में ससम्मान पूजनीय मानी जाती थीं। हिंदू धर्म में परम्परा के अनुसार धन की देवी ‘लक्ष्मी मां’, ज्ञान की देवी ‘सरस्वती मां’ और शक्ति की देवी ‘दुर्गा मां’ मानीं गई हैं। नवरात्रों में ‘मां’ को नौ विभिन्न रूपों में पूजा जाता है। मुस्लिम धर्म में भी ‘माँ’ को सर्वोपरि और पवित्र स्थान दिया गया है। इस्लाम में भी यह कहा गया है कि मां के कदमों तले जन्नत होती है।

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ईसाइयों के पवित्र ग्रन्थ में बाइबिल में भी लिखा गया है कि ‘माता के बिना जीवन होता ही नहीं है।’ ईसाई धर्म में भी ‘माँ’ को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। इसके साथ ही भगवान यीशु की ‘मां’ मदर मैरी को सर्वोपरि माना जाता है। बौद्ध धर्म में महात्मा बुद्ध के स्त्री रूप में देवी तारा की महिमा का गुणगान किया गया है। यहूदी लोग भी ‘मां’ को सर्वोच्च स्थान पर रखते हैं। यही विश्व है हर धर्म मे एक राय स्त्री ही निर्विवाद है ।
रोशनी लाल ऑस्ट्रेलिया

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