यूपी : मायावती के 50 करोड़ डकार गए नसीमुद्दीन, खुद को बचाने के लिए की थी फोन रिकार्डिंग

बसपा सुप्रीमो मायावती का पैसा डकार जाने वाले नसीमुद्दीन सिद्दकी अब अपनी जान माल की रक्षा करने की गुहार सीएम योगी आदित्यनाथ से लगा रहे हैं. ये वही नसीमुद्दीन सिद्दकी हैं, जो कल तक बहनजी- बहनजी करते रहते थे, लेकिन अचानक बहनजी उनसे क्यों नाराज हो गयीं. इसके पीछे की वजह जानकार कोई भी नसीमुद्दीन को माफ़ नहीं करेगा. यहां तक कि नसीमुद्दीन को भी ये मालूम था कि बहनजी उन्हें पार्टी से निकाल सकती हैं. इसीलिए उन्होंने बहनजी से फोन पर अधिक बात न करते हुए बातचीत की रिकार्ड की गयी ऑडिओ में ये बात भी कह डाली कि मैं अपनी प्रापर्टी बेचकर आपका पैसा वापस करूँगा.

सूत्रों के मुताबिक नसीमुद्दीन की नियत पैसों को लेकर पहले ही ख़राब हो चुकी थी. इसीलिए उन्होंने मायावती से की गयी बातचीत फोन से रिकार्ड की. बताया जाता है कि उन्हें ये भी मालूम था कि अगर वह पार्टी से बेज्जत कर निकाले जाते हैं, तो उनकी ये रिकार्डिंग ब्रह्मास्त्र का काम करेगी. हुआ भी यही. पार्टी के जानकारों के मुताबिक यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान बहनजी से मिलकर नसीमुद्दीन सिद्द्की ने तकरीबन 100 मुस्लिम प्रत्याशियों को पार्टी से टिकट दिलवाया था. ये सभी टिकट बेचे गए थे. लेकिन जब पीएम मोदी ने 500 और 1000 रुपये कि नोटों पर सर्जिकल स्ट्राइक कि तो इतनी बड़ी रकम का हिसाब दे पाना बहनजी के लिए टेढ़ी खीर था. नतीजतन मायावती ने नसीमुद्दीन के जरिये सभी प्रत्याशियों को अपने आवास पर बुलाकर पुरानी नोट बदलकर नई नोटें लेकर देने कि बात कही.

दरअसल ये 50 करोड़ रुपये का मामला है, जो यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान नसीमुद्दीन को पार्टी के प्रत्याशियों से लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती तक पहुँचाना था, लेकिन इस पैसे को मायावती तक पहुँचाने की बजाय नसीमुद्दीन खुद डकार गए. सूत्रों के मुताबिक नसीमुद्दीन ने पार्टी से निकाले जाने के बाद जब प्रेस कांफ्रेंस कर मायावती पर ब्लैकमेलिंग का आरोप लगते हुए रिकार्ड की गयी ऑडियो क्लिप जारी की तो उसमें मायावती ने बातचीत करते हुए नसीमुद्दीन से जो काम कहे थे, वो यही काम थे कि चुनाव के दौरान तुम्हारे कहने पर जिन लोगों को टिकट दिए थे. उनसे पैसा लेकर मुझे दो. लेकिन नसीमुद्दीन से फोन पर मायावती ने कुछ भी ऐसा नहीं बोला था. उन्होंने ये भी कहा था कि फोन की बजाय तुम घर पर आ जाओ तो बैठकर बात हो जाएगी, लेकिन नसीमुद्दीन उनसे गोलमोल बातें करते रहे. यहां तक की बिना बहनजी के कुछ कहे ही उन्होंने फोन पर उनसे ये तक कह डाला कि मैं आपका हिसाब चुकता कर दूंगा. अपनी सारी प्रापर्टी बेचकर.

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इस काम कि जिम्मेदारी नसीमुद्दीन को दी गयी थी. बताया जाता है कि नसीमुद्दीन ने इन सभी प्रत्याशियों से नई नोटें तो ले लीं. लेकिन रकम मायावती के पास तक नहीं पहुंची. बसपा सुप्रीमो जब भी नसीमुद्दीन से बात करती तो वह ये कहकर टाल जाते कि पैसा मिल जायेगा. लेकिन जब चुनाव हो गए. पार्टी चरों खाने चित हो गयी तो नसीमुद्दीन की नियत भी ख़राब हो गयी और वह बहनजी के तकरीबन 50 करोड़ रुपये डकार कर बैठ गए. दरअसल ये भारी भरकम रकम पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रत्याशियों ने पूर्व में मायावती से हुई बातचीत के बाद टिकट के एवज में तय की गयी थी. इन टिकटों को दिलवाने में नसीमुद्दीन ने बिचौलिये की भूमिका अदा की थी. जिसके चलते ही मायावती उनसे बार-बार फोन पर उस काम को पूरा करने के लिए कह रही थीं.

सूत्रों के मुताबिक मायावती ने जब अपने संपर्क सूत्र भेजकर इस रकम को देने का उन कंडीडेटों पर दबाव बनाया तो उन्होंने बता दिया कि वो तो रकम नसीमुद्दीन को दे चुके हैं, जिसके बाद मायावती ने फोन कर इसीलिए नसीमुद्दीन से कहा था कि फोन पर बात करने की बजाय वो उनके बंगले पर आ जाएँ तो बैठकर बात हो जाएगी. लेकिन नसीमुद्दीन इसीलिए बंगले पर जाने से कतराते रहे. और अब अपनी जानमाल का खतरा बताकर सीएम योगी से सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं. फिलहाल सत्ता के गलियारों में भी इस बात की चर्चा जोरों पर है कि नसीमुद्दीन बड़ा शातिर निकला, जिसने बहनजी के पैसे ही दाब दिए. यही नहीं अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी के सदस्य और यूपी मनरेगा योजना के चेयरमैन संजय दीक्षित भी ये कहते हैं कि बसपा सुप्रीमो मायावती के पचास करोड़ रुपये डकार जाने के बाद नसीमुद्दीन ने अपने सुनियोजित प्लान के तहत उन्हीं पर ब्लैकमेलिंग के आरोप जड़ दिए. उन्होंने कहा इस मामले कि उच्च स्तरीय जाँच कराई जानी चाहिए.

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