यूपी में अपने इन दो सबसे वरिष्ठ विधायकों को बड़ी जिम्मेदारी दे सकते हैं मोदी-शाह

भाजपा से सबसे अधिक बार जीत दर्ज कर यूपी विधानसभा में पहुंचने वाले नेताओं में इस वक्त नंबर वन सुरेश खन्ना हैं तो दूसरे नंबर पर सतीश महाना। खन्ना जहां एक ही सीट से लगातार आठवीं बार तो महाना सातवीं बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। खास बात है कि दोनों नेता पार्टी में निवर्तमान विधानसभा में नंबर वन व दो की हैसियत भी निभा रहे। सुरेश खन्ना जहां नेता विधानमंडल हैं तो महाना उपनेता। वरिष्ठता को देखते हुए नई भाजपा सरकार में इन दोनों नेताओं का नाम यूपी के मुख्यमंत्री के दावेदारों में उछल रहा है। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री न भी हुए तो स्पीकर नहीं तो सरकार में अहम महकमे मिलना तय हो। क्योंकि भाजपा के दोनों सबसे वरिष्ठ विधायक हैं। विधानसभा में खूब बोलना-सवाल पूछना इनकी खूबी है। तार्किक बहस व हर बार चुनाव में जीत से पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इन्हें पसंद करता है। दिल्ली में संसदीय बोर्ड की मीटिंग के दिन रविवार को यूपी भवन में दोनों नेता इंडिया संवाद से मुखातिब हुए। मुख्यमंत्री दावेदारी के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे खुद को दावेदार नहीं मानते। हालांकि  यह भी कहा कि पार्टी से जो भी जिम्मेदारी मिलेगी, वह उठाने को तैयार हैं। मुख्यमंत्री का नाम संसदीय बोर्ड तय करता है। उसी का फैसला सर्वमान्य है।

कानपुर से सातवीं बार विधायक बने व भाजपा के विधानमंडल उप नेता सतीश महाना कहते हैं कि जिस तरह से प्रचंड जनादेश जनता ने भाजपा को दिया है, उससे हमारी पार्टी की सरकार पर जनता की उम्मीदों पर सौ नहीं दो सौ प्रतिशत खरा उतरने का दबाव है। क्योंकि यह जनादेश सपा-बसपा सरकार में हुए जोर-जुल्म, भ्रष्टाचार के खिलाफ है। जनता ने पीएम मोदी की भ्रष्टाचार मुहिम को पसंद किया। उन्हें लगा कि कोई नेता आज ऐसा मिला है, जिस पर भरोसा किया जा सकता है। जो देश को नई ऊंचाई पर ले जा सकता है। जो विकास की उम्मीदों को पंख लगा सकता है। नतीजा उन्होंने 2014 में केंद्र में तो अब 2017 में यूपी में भी भाजपा की बहुमत से सरकार बना दी। महाना ने कहा कि बसपा मुखिया पैसे लेकर टिकट बेचने का काम करती रहीं। वोटबैंक को अपना गुलाम समझतीं रहीं। वहीं अखिलेश यादव हाईवे और मेट्रो को ही समूचे यूपी का विकास समझ बैठे। सिर्फ लखनऊ का विकास पूरे यूपी का विकास नहीं है। अखिलेश जिस हाईवे को अपनी उपलब्धि बताते हैं वह उन्होंने 30 करोड़ रुपये प्रति किमी की दर से बनाई है, वहीं केंद्र सरकार 16 करोड़ प्रति किमी की दर से हर दिन 18 किमी हाईवे बना रही है। यह सब जनता ने समझा और सरकार को उखाड़ फेंका।

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शाहजहांपुर से 1989 से लगातार आठवीं बार विधायक बने सुरेश खन्ना ने बातचीत में कहा कि यूपी में भाजपा की प्रचंड जीत सपा-बसपा के दस साल के कुशासन के खिलाफ जनादेश रहा। जनता में दोनों दल एक्सपोज हो गए। केंद्र में मोदी सरकार का आम जन के लिए किया कामकजा और भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम को जनता ने पसंद किया। नतीजा आज सबके सामने है। सरकार बनने पर प्राथमिकता के सवाल पर खन्ना ने कहा कि सपा सरकार में बेपटरी कानून व्यवस्था से जनता रोती रही। हमने इसे चुनाव में मुद्दा भी बनाया था। भाजपा सरकार की पहली कोशिश जनता को न्याय दिलाना, थानों की कार्यप्रणाली दुरुस्त करना,कानून-व्यवस्था का इकबाल दुरुस्त करना है। लखनऊ विवि से एलएलबी कर राजनीति में उतरने वाले 58 वर्षीय खन्ना भाजपा सरकार में नगर विकास मंत्री रह चुके हैं। खास बात है कि शाहजहांपुर में बमुश्किल से उनकी बिरादरी का 17 सौ वोट है, फिर भी वे आठ बार से लगातार चुनाव जीत रहे हैं। वजह है उनका जमीन से जुड़ाव।

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