दहशत के माहौल में जी रहे हैं मोदी के संसदीय क्षेत्र के मुसलमान

आज सुबह से ही मैं प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के मुस्लिमबहुल इलाके में हूँ। सिर्फ यह जानने के लिये कि प्रदेश में योगी सरकार के आने के बाद इस समुदाय के लोग योगी के साथ ही अपने सांसद और प्रधान मंत्री मोदी के बारे में क्या सोचते हैं। इस बात में सबसे पहले लोगों ने इशारे में सिर्फ इतना ही जता दिया था कि इनकी बस्तियों में हर तरफ एक अजीब दहशत का सा माहौल है। इसे लेकर कल शाम को ही थाना भेलूपुर के सामने गुस्से से बौखलाये सैकडों लोंगो ने मोदी मुर्दाबाद और योगी मुर्दाबाद के नारे लगाये थे।

मोहम्मद जाहिद इस शहर के नरीया इलाके का रहने वाला है। थाना भेलूपुर में पुलिस वालों के सामने अपनी दास्तान कहते हुए यह रो पडा। इसका कहना रहा है कि 14 अप्रैल की रात में लगभग दस बजे पांच बाइकों पर सवार लोग उसे ओवरटेक करके उसके आगे खडे हो गये। इसके बाद उन लोगों ने मेरे पास आकर जोरों से मेरी ढाढी खींची। मेरे मना करने पर वे सारे लेाग मुझ पर टूट पडे और लातघूंसे से मुझे बहूत बुरी तरह मारा। उनके हाथों मे नुकीले लोहे की कोई चीज़ थी, उससे मेरे सिर पर लगातार इतनी गहरी चोट दी कि मेरा सिर फट गया। उसमें 16 टांके लगवाने पडे हैं। इन लोगों ने अपने चेहरे पर भगवा रंग की नकाब डाल रखी थी। जाते समय यह घमकी दे गये कि चले जाओं साले पाकिस्तान। तुम डढियलों को यहां नहीं रहने देंगे।

इस भीड मे खासी तादाद ऐसे लोगों की भी रही है, जिन्होंने आज कहा कि उन सबने सीना ठोंक कर मोदी को वोट दिया था। सिर्फ उनके सबका साथ-सबका विकास के दावे पर ही भरोसा करके। लेकिन, यह भरोसा अब टूट गया है। हम लोगों ने उन्हें वोट दिया था और इसके बदले योगी सरकार मे हम दहशत की जिंदगी जीने के लिये मजबूर कर दिये गये हैं। पुलिस एकतरफा कार्रवाई कर रही है। ताल्लुकात वाले पुलिसजन दबी जुबान से इतना तो कह ही देते हैं कि उनके मूँह और कान दोनों बंद कर दिये गये हैं। यह दर्द एक दो नहीं, प्रधान मंत्री के संसदीय क्षेत्र की प्रायः सभी मुस्लिम बस्तियों के वाशिंदों का है। जवान से लेकर बूढों तक का। डर है कि यह चिंगारी कही आग के शोले न बन जाये, जिसकी लपट में तमाम बस्तियां खाक न हो जाये।

इस संबंध में मदनपुरा के परवेज अहमद का कहना रहा कि बनारस के 30 से 40 प्रतिशत के बीच मुसलमानों ने मोदी को ही वोट दिया था। खुद उन्होंने भी ताल ठोककर इन्हें ही वोट दिया था। वैसे, यहां के मुसलमानों को आज भी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से कोई भी शिकायत नहीं है। उनकी तीन साल की सरकार के कामकाज से हम लोग बहुत खुश हैं। लेकिन, योगी की सरकार से आम मुसलमान उतना ही नाखुश है। उसकी यह नाराजगी लगातार बढती ही जा रही है। खासतौर से लौ एंड आर्डर के बिगड़ते जा रहे हालात को देखकर। लेकिन, इसमें मोदी का क्या कसूर। योगी ने कभी कहा था कि अगर एक हिंदू मारा जायेगा, तो सौ मुसलमानों को मार डाला जायेगा। आज यह जो कुछ हो रहा है, उस पर इन बातों का असर पड़ना लाजिमी ही है। आखिर है तो यह योगी की ही सरकार।

यह खबर मिलते ही लोगों ने भेलूपुर थाने की पुलिस से अपराधियों की गिरफ्तारी के लिेये दवाब डालना शुरू कर दिया। लेकिन, पुलिस ने आज तक एक भी गिरफ्तारी नहीं की। इसकी बजाय दो दिनों से 24 घंटे की मोहलत मांगती चली आ रही है। लिहाजा, कल शाम लगभग पांच सौ लोगों ने थाने का जबरदस्त घेराव किया और मोदी मुर्दाबाद-योगी मुर्दाबाद के नारे लगाये। इसके बावजूद, पुलिस अभी तक बेअसर है।

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उसके बाद जैसे उनके मुँह की बात छीनते हुए शकील अहमद ने कहा कि इधर 15-20 दिनों से हमारी बहूबेटियों की आबरू पर आंच आ रही है। भगवा नकाबधारी लोग रात को सात आठ बजे के आसपास उनके बुर्के खींच कर कहने लगे हैं कि इसे उतार फेंको। अब तो आये दिन यही हो रहा है। कल शाम को तो हमारे मोहल्ले की एक जवान लडकी खौफ खाकर गिर पडी थी। पुलिस के पास जाओं तो वह शिकायत तक सुनने को तैयार नहीं है। आखिर कब तक हम लोग यह जुल्म और ज्यादिती बर्दाश्त करते रहेंगे। लिहाजा, एक दिन जो नहीं होना चाहिये, वह भी होकर रहेगा। हमारे नवजवानों के भी जिस्म में खून है, पानी नहीं।

बातचीत के दौरान इनके अगल बगल बैठे लोगों ने बीच में ही इनकी बात काटकर कहा कि पिछले लोकसभाई चुनाव के दौरान मोदी जब मुस्लिम बहुल आबादी मदनपुरा के पास से होकर गुजर रहे थे, तो हम लोगों को देखकर उन्होंने अपनी गाडी रोकवाई थी। उस समय लोगों ने उन्हें शाँल और गुलदस्ता दिया था। उस शाँल को बडे अदब और मोहब्बत से अपने सिर पर रखकर उन्होने शुक्रिया अदा किया था। इतना ही बहुत हैं। वह आज भी हम सबके दिल में बसे हुए हैं। लेकिन इतना कह कर वह चुप हो गये।

बात का प्रसंग बदलते हुए जनजीवनपुरा के मोहम्मद मोसिस्फ ने यह कहकर अपना दर्द उडला कि मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ ने अवैध बुचडखानों पर पाबंदी लगाकर कोई बुरा काम नहीं किया। लेकिन, इस पर अचानक ताबड़तोड़ कार्रवाई करने के बजाये इन बूचडखानों के मालिकों को वार्निंग देकर एक महीने का समय दे देते, तो उनका क्या बिगड जाता। इस दौरान, वे अपना कागजीकाम पूरा कर सकते थे।

 

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