यूपी में कोरोना संक्रमितो की संख्या 2 हजार के पार, 400 हो चुके डिस्चार्ज, 31 की मौत

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ती चली जा रही है लेकिन राहत की खबर ये है कि अबतक 400 संक्रमित सही हो चुके हैं। प्रमुख सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) अमित मोहन प्रसाद ने मंगलवार को बताया कि प्रदेश में एक्टिव केसेज (अभी संक्रमित मरीजों) की कुल संख्या 1612 है। कुल 400 लोग पूरी तरह से उपचारित होकर घर जा चुके हैं जबकि 31 लोगों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हुई है। प्रमुख सचिव ने बताया कि संक्रमण के कुल 2043 मामले प्रदेश के 60 जिलों से अब तक सामने आये हैंं। इस समय कुल 22 जिले ऐसे हैं, जहां संक्रमण का कोई मामला नहीं है। इनमें 7 जिले संक्रमित होने वाले 60 जिलों के शामिल हैंं। उन्होंने बताया कि कल कुल 4384 नमूने की जांच की गई और 2900 नमूने लैब भेजे गए।

प्रमुख सचिव ने कहा कि संक्रमण का सबसे बडा स्रोत मेडिकल इंफेक्शन निकलकर आ रहा हैं अस्पतालों में डाक्टर और नर्स संक्रमित हो रहे हैं और उनसे अन्य लोगों में संक्रमण जा रहा है। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसके प्रति चिंता जाहिर कर चुके हैं। कई जनपदों से स्वास्थ्यकर्मियों के संक्रमित होने के प्रकरण सामने आए हैं।

इस दौरान अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि इसे रोकने के लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में समितियों का गठन कर लिया गया है, जिनमें डाक्टर, आईएमए, डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ के प्रतिनिधि, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी और क्वालिटी कंसल्टेंट सदस्य हैंं। सभी समितियों से कहा गया है कि मंडलीय मुख्यालयों के जनपद कम से कम 10 अस्पतालों और अन्य जिलों के कम से कम 5 अस्पतालों की सूची बनाकर उनके एक-एक नोडल अधिकारी को कल प्रशिक्षण देंगे कि मेडिकल इन्फेक्शन के प्रोटोकाल का पालन कैसे करना है।

Gyan Dairy

उन्होंने बताया कि नोडल अधिकारी अपने-अपने अस्पताल के अन्य डाक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। ये प्रशिक्षण कल हो जाएगा ताकि 30 अप्रैल से ये अस्पताल प्रोटोकाल का पालन करते हुए आकस्मिक एवं आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं दें, जिससे स्वास्थ्य कर्मी भी बचे रहे और लोगों को सुविधाएं मिलती रहें।

पीपीई किट के बारे में प्रमुख सचिव ने बताया कि पहले पीपीई किट एच 1 एन 1 के लिए ली गयी थीं और पूरे प्रदेश में इस्तेमाल की गई थीं। इन किट की तुलना अभी की किट से नहीं की जानी चाहिए क्योंकि पुरानी वाली किट मात्र 115 रूपये की थी और अभी की किट 1100 रूपये की है यानी दाम में दस गुना फर्क है। वो किट उस समय के लिए मंजूर की गयी थीं, उनका पूरे प्रदेश में उपयोग किया गया है. किसी को कोई संक्रमण नहीं हुआ हैं।

Share