अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी पूनम चौहान की डेंगू से मृत्यु हो गई.

अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी पूनम चौहान की डेंगू से मृत्यु हो गई. पूनम अविवाहित थी और अपने माता पिता के साथ रहती थी. पूनम के पिता ने कहा, जब उसकी तबीयत बहुत खराब हो गयी तो उसने पूछा कि मुझे बचा लेंगे ना पापा. मैंने कहा, हां बेटा उसे ये भी बताया कि उसकी मदद के लिए कई लोग सामने आये हैं. उसे खून की कमी थी मदद के लिए कई लोग सामने आये थे.

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पूनम इंडियन फुटबाल टीम और यूपी की बेस्ट स्ट्राइकर थीं। यूपी की पहली सीनियर महिला खिलाड़ी का दर्जां भी उनके नाम था,जिसके बाद पूनम ने इंडियन टीम में जगह बनायीं थी।
 सरकार और फेडरेशन की अनदेखी की वजह से पूनम पिछले कई दिनों से शिवपुर में पिता मुन्ना लाल चौहान के साथ स्टेशनरी की दुकान चलाती थी। जहां वह किताबों के बाइंडिंग का काम करती थी। सिगरा स्टेडियम में फुटवाल मैच होने वाला है। परिसर की सफाई में इंटरनेशनल प्लेयर पूनम चौहान अपनी सहयोगियों के साथ मिलकर पिछले कई दिनों से लगी थी। ऐसा बताया जा रहा है उसी सफाई के दौरान पूनम चौहान को मच्छरों ने अपना शिकार बना लिया ।पूनम चौहान डेंगू के चपेट में आईं और उनकी मौत हो गई।
  शिवपुर स्टेडियम में जब प्रैक्टिस करती थी ,तो मज़बूरी में लड़कों के बीच में खेलना पड़ता था,बिना शर्माएं लड़कों के बीच खेली ,गालियां भी बहुत सुनी प्रेक्टिस के दौरान।लोग ताना मारते थे ,लड़की होकर लड़का बन गयी।डीएम विजय किरण ने सिगरा में प्रोत्साहन समिति के मेंबर के तौर पर मुझे रख लिया, लेकिन इससे क्या होने वाला है। इंटरनेशनल खेलने के बाद भी मंत्रालय ने ये कह दिया कि- हम तुम्हें इंटरनेशनल प्लेयर नहीं मानते। सीएम से मिलने के लिए तीन दिन उनके ऑफिस के बाहर सुबह से शाम तक बैठी रही लेकिन मुलाकात नहीं हो पाई,पीएम नरेंद्र मोदी को लेटर लिखा लेकिन अभी तक जबाब नहीं आया।5 वर्ष साल की उम्र से ग्राउंड में पिता मुन्ना लाल चौहान की उंगली पकड़ कर जाती थी,माँ सुभावती देवी ने भरपूर सपोर्ट किया।2001 में पहला सीनियर नेशनल 13 साल की उम्र में लुधियाना में खेला जिसमे 4 गोल दागे।यूपी टीम की 5 बार कैप्टन रहीं, 2003 में जूनियर के तौर पर और 2004 ,2005 ,2008 ,2010 -सीनियर के तौर पर रहीं।2012 में पहली बार बीएचयू में महिला अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल ने ही बनायी और यूनिवर्सिटी की कैप्टन भी बनी ।15 जून 2015 को भदोही में एडहॉक पर फुटबाल कोच के तौर पर नियुक्ति हुई और जनवरी 2016 में नियुक्ति समाप्त हो गई।(2006)- दो बार इन्डियन टीम की ओर से (afc )चैम्पियनशिप ,दिल्ली और मलेशिया खेली ।(2010)- में सीनियर इंडियन टीम की ओर से साऊथ एशियन गेम (सैग )में गोल्ड मैडल मिला।
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