सपा और बसपा की सरकारों की भांति मलाईदार विभागों में तैनाती की दौड़ नही

हमेशा की भांति इस बार नई सरकार के गठन के बाद  तैनाती के लिये मारामारी अभी शुरू नहीं हुई है।

दूसरी दौड़ आई ए एस अधिकारियो और पी सी एस अधिकारियो की होती है। जिलो में तैनाती,जातिगत आधार और पार्टी पदाधिकारियो से दबाव डलाकर अधिकारी वर्ग अपनी सुयोग्य तैनाती कराने में सफल होते है। तीसरा नम्बर सचिवालय सेवा के अदिकारियो और कर्मचारियो का होता है।

नई सरकार के गठन के बाद उत्तर प्रदेश सचिवालय में सबसे पहले जातिवाद एयर धर्म के आधार पर मलाईदार पदों पर अधिकारियो और कर्मचारियो की दौड़ शुरू हो जाती है।मंत्रियो के Letter pad पर लिखे पत्रों पर निजी सचिव और अपर निजीसचिव स्तर के लोग मुख्यमंत्री,उप मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री,और उप व राज्य मंत्रियो से अपनी तैनाती की संस्तुति का पत्र लिखाते दिखाई देते है।सबसे मलाईदार पड़ यही होते है।इन पदों पर काम करने वाले मंत्री और जनता के बीच की कड़ी होते है।

पदों पर तैनाती का सबसे अधिक असर सचिवालय के मलाईदार विभागों जैसे सिचाई,लोक निर्माण, चिकित्सा,स्वास्थ, खाद तथा रसद विभाग के साथ साथ आवास विभाग में तैनाती की मारामारी होती थी।मुलायमं के चहते अधिकारियो की तैनाती पंचम तल पर बैठे मुलायम के भक्तों द्वारा की जाती थी।

मुलायम सिंह,मायावती और अखिलेश सरकार के कालो में तो इस कार्यवाही ने प्रतिस्पर्धा का रूप ले रखा था।मुलायम सरकार में तो जातिगत आधार पर ही सचिवालय की क्रीम और मलाईदार पदों पर सिर्फ यादव जाति के लोगो की ही तैनाती की जाती थी।

सहायक से लेकर सचिवालय सेवा के संयुक्त सचिव तक की तैनाती पंचम ताल से ही होती थी।ऐसे तैनात अधिकारियो को अप्रत्यक्ष रूप से पैसा कमानी की खुली छूट रहती थी।

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मायावती सरकार के गिरने के बाद समाजवादी पार्टी की पुनः सरकार बनी। मायावती सरकार में बेदखल किये गये यादव अधिकारियो ने  पुनः आवास और अन्य विभागों में उसी पद पर तैनाती कराकर एक इतिहास रच डाला। मायावती सरकार में तैनात एक एक दलित से  चुन चुन कर बदला लिया गया और उन्हें ऐसे महत्वहीन पदों पर तैनात किया गया कि उनका जीवन ही दुर्लभ हो गया। यह दलित वर्ग 5 वर्ष मायावती की सरकार बनने की प्रतीक्षा करता रह गया और मायावती मुसलमानो का साथ लेकर इनका सपना साकार न कर सकी।

मुलायम सरकार बदलते ही यह काम मायावती सरकार में और प्रबल हो गया जब यादवो को हटाकर मलाईदार पदों पर दलित वर्ग के  अधिकारियो और कर्मचारियो की तैनाती की गई।आवास विभाग में तो दलित समाज के पंचम तल पर बैठने वाले मायावती के ख़ास प्रमुख सचिव  आवास विभाग के  अनुभाग अधिकारी तक के स्थानांतरण कराने में अपनी निजी भूमिका अदा करते थे। आवास विभाग में एक समय ऐसा था कि जब 90 % मलाईदार पदों पर दलित समाज के व्यक्ति ही कार्यरत थे।

आज सपा सरकार के आशीर्वाद से आवास विभाग और अन्य मलाईदार पदों पर  बैठे लोग करोड़ पति से लेकर अरब पति तक बन चुके है। यदि पूर्व सरकारों के चहेते अधिकारियो की सम्पत्ति और खातों की जाँच करा दी जाये तो निश्चित रूप से अनेकों अधिकारी स्वेक्षिक  सेवानिवृति लेकर नौकरी से गायब  जायगे।

 

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