आखिर शुगरडैडी राहुल को नहीं बचा पाए, योगी ने राजीव को बनाया मुख्य सचिव

एक बड़े भाजपा नेता से  सांठगांठ कर नई सरकार में भी तीन महीने तक मुख्य सचिव की कुर्सी सलामत रखने में सफल रहे राहुल भटनागर को आखिरकर जाना ही पड़ा। दस करोड़ रुपये देकर कुर्सी बचाने की बातें सत्ता के गलियारे में उछलनी शुरू हुईं तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लगा कि सरकार की बदनामी हो रही है। बस फिर क्या था कि उन्होंने राहुल भटनागर की कुर्सी छीनते हुए सीनियर आईएएस राजीव कुमार को सौंप दी।

राहुल भटनागर सपा सरकार में अखिलेश के चहेते अफसरों में शुमार थे। इस वजह से अखिलेश ने उन्हें मुख्य सचिव बनााया थ। जब योगी सरकार बनी तो कुछ दिनों बाद  डीजीपी जावीद अहमद हटा दिए गए। नजरें अब मुख्य सचिव पद पर नई तैनाती की तरफ थीं। मगर राहुल भटनागर की कुर्सी सौ दिन में भी टस से मस नहीं हुई तो सवाल उठने शुरु हुई। इस बीच राहुल भटनागर के मुख्य सचिव पद पर बने रहने को लेकर सत्ता के गलियारे में तमाम बातें उछलती रहीं। लखनऊ के कुछ भाजपा नेताओं में ही अंदरखाने  चर्चा रही कि शुगर लॉबी ने सूबे में संगठन का काम देख रहे  ताकतवर नेता को 10 करोड़ रुपया दिया। ताकि वे कुर्सी पर बने रहें।

रिपोर्ट के जरिए उठाया था सवाल- ‘शुगर डैडी’ मुख्य सचिव राहुल को आखिर किस भाजपा नेता के दबाव में नहीं हटा पा रहे योगी.

Gyan Dairy

राहुल भटनागर चीनी मिल मालिकों को अरबों का लाभ सपा सरकार में पहुंचाते रहे हैं। जबकि गन्ना किसानों के बकाए भुगतान को लेकर राहुल पूरी तरह से उदासीन रहे। यही वजह है कि मुख्य सचिव बने रहने के बाद भी वह गन्ना  विभाग के प्रमुख सचिव का पद भी अपने पास हथियाए रखे हैं। यह महकमे में उनकी निजी रुचि दर्शाता है।यही वजह है कि शासन-सत्ता के गलियारे में उन्हें शुगरडैडी कहा जाता रहा। चुनाव के समय भाजपा ने मुख्य सचिव राहुल भटनागर के भ्रष्टाचार की शिकायतें कर हटाने की मांग की थी। मगर सरकार बनने के सौ दिन बाद भी कुर्सी सलामत होने पर सवाल उठ रहे थे। लोग चुटकी ले रहे थे कि क्या भाजपा सरकार में मुख्य सचिव राहुल भटनागर अब ईमानदार हो गए।

गोमती रिवर फ्रंट घोटाले की जांच में भी मुख्य सचिव  राहुल भटनागर को बचाने की एक कोशिश हो रही है। जिस न्यायिक रिपोर्ट के आधार पर कल गोमती नगर थाने में जो एफआईआर दर्ज हुई उसमें भी सिर्फ अभियंताओं को ही दोषी ठहराया गया है। असली घोटालेबाज अफसरों और नेताओं को बख्श दिया गया। इस जांच रिपोर्ट और उसके बाद हुई कार्रवाई पर आम आदमी पार्टी ने सवाल उठाते हुए कहा है कि यह सपा और भाजपा का मिलाजुला खेल है। इस रिपोर्ट से साफ है कि हजारों करोड़ के घोटाले के असली गुनाहगारों को प्रभावशाली पद पर बैठे हुए लोग बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

Share