प्रख्यात साहित्यकार मुनेन्द्र नाथ श्रीवास्तव का निधन, साहित्यकारों में शोक की लहर

प्रयागराज। यूपी  के प्रयागराज में विख्यात लेखक, कवि, रंगकर्मी व अधिवक्ता मुनेन्द्र नाथ श्रीवास्तव का बुधवार रात में निधन हो गया। गुरुवार को उनका अंतिम संस्कार रसूलाबाद घाट पर किया गया। उनके सबसे छोटे पुत्र अधिवक्ता अवनीश श्रीवास्तव ने उनको मुखाग्नि दी। उंचवागढ़ी राजापुर के रहने वाले मुनेन्द्र नाथ कई माह से अस्वस्थ थे। वह अपने पीछे दो पुत्र, पत्नी, बहू, तीन पोते व दो पोतियों का परिवार छोड़ गए हैं। उनके पुत्र डॉ. रजनीश श्रीवास्तव इविवि के जेके इंस्टीट्यूट में प्रोफेसर हैं।

मुनेन्द्रनाथ के निधन पर शहर के साहित्यकारों व संस्थाओं ने गहरा शोक व्यक्त किया और श्रद्धांजलि अर्पित की। मूल रूप से हंडिया के केवलापुर के रहने वाले मुनेन्द्र ने कई विधाओं में लेखन के साथ नाटकों में अभिनय किया। वह जिला अधिवक्ता संघ के उपाध्यक्ष भी रहे। मुनेन्द्र ने साहित्य की कई विधाओं में लेखन किया। हनुमानजी पर लिखा उनका प्रबन्ध काव्य हनुमत स्तवन चर्चित रहा। साथ ही अवधी में काव्य संग्रह का करब हरखू का दर्द, अनगिन आंखें एक रुमाल गीत संग्रह, इशू गीत बाल गीत संग्रह प्रकाशित हुए।

उपन्यास एक चुटकी राख और काव्य संग्रह अजेय सुभाष अप्रकाशित है। मुनेन्द्रनाथ के निधन पर साहित्यकारों व संस्थाओं ने शोक जताया। सर्जनपीठ की ओर से पृथ्वीनाथ पाण्डेय की अध्यक्षता में हुई शोक सभा आयोजित की गई। जयशंकर मिश्र, डॉण् प्रदीप चित्रांशी, केशव सक्सेना, अशोक कुमार स्नेही, मधुसूदन तिवारी, करुणेश, आदि सहित्यकारों ने शोक व्यक्त किया। गुफ्तगू के अध्यक्ष इम्तियाज अहमद गाजी ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

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