योगी आदित्यनाथ पर बहुत बड़ा खुलासा, मोदी ने आखिर कैसे लिया इनको मुख्यमंत्री बनाने का फैसला!

कानपुर : उत्तर प्रदेश में प्रचंड बहुमत के साथ भाजपा ने चुनावी दंगल फतह किया। सूबे में सीएम के नाम पर कई दिन तक चर्चा चली। शनिवार को भाजपा विधायक दल की बैठक हुई, जिसमें गोरखपुर के सांसद बाबा योगी आदित्यनाथ को विधायकों ने सर्वसम्मति के साथ सूबे के नए सीएम के तौर पर चुन लिया। आपको बता दें कि पिछले जून 2016 में इलेक्शन से पहले कमल खिलाने को लेकर कानपुर के बिठूर स्थित एक इंजीनियरिंग कॉलेज में संघ प्रमुख मोहन भागवत लाव लश्कर के साथ नौ दिन तक रुके थे।

यहीं पर यूपी का किला जीतने के लिए रणनीति बनाई गई थी। बैठक में देशभर से आए 41 प्रान्त प्रचारको ने यूपी में बाबा को भाजपा सीएम कैंडीडेट के तौर पर प्रोजेक्ट करने की मांग रखी थी। इसी के बाद बैठक के आखरी दिन भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव और मोहन भागवत ने इनके नाम को फाइनल कर दिया था। इस खबर को सिर्फ पत्रिका डॉट कॉम में प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया गया था। पत्रिका ने सिर्फ इस खबर को 16 जुलाई 2016 को प्रकाशित किया था।

नाम आते ही बजे घंटा और घड़ियाल

योगी के सीएम चुने जाने के बाद कानपुर में जय श्रीराम के नारे लगने शुरू हो गए। एतिहासिक आन्देश्वर मंदिर में लोगों ने पूजा की । मंदिर के पुजारी अजय पुरी ने कहा कि 1992 के बाद यूपी में राम राज आया है। वहीं पनकी हनुमान स्थित गोरखपुर के रहने वाले सैकड़ों लोग परिसर में पहुंचे। इस दौरान घंट घड़ियाल की आवाज से पूरा परिसर योगीमय हो गया। हनुमान मंदिर के महंत ने बताया कि बाबा के आने के बाद शहर से पलायन रूकेगा और 2018 में राम मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा।

मोहन भागवत के चलते मिली कुर्सी

पिछले साल संघ प्रमुख ने यूपी में कमल खिलाने के लिए एक बड़ी बैठक की थी। नौ दिन तक यूपी जीतने के लिए मोहन भागवत ने प्रांत प्रचारकों के साथ मंथन किया। करीब 41 प्रान्त प्रचारकों ने सर्वसम्मति के साथ बाबा योदी आदित्यनाथ को भाजपा का सीएम कैंडीडेट के तौर पर प्रोजेक्ट करने की मांग रखी थी। साथ ही संघ से जुड़े संगठन के पदाधिकारी भी योगी को सीएम बनाने के लिए अड़े थे । बैठक के पांचवे दिन खुद संघ प्रमुख ने योगी का नाम यूपी के सीएम के तौर पर फाइनल कर इसकी जानकारी भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव को देकर उन्हें कानपुर में आने को कहा था।

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बिठूर में इन दो मुद्दों पर हुई थी चर्चा

बिठूर में यूपी चुनाव को लेकर जो बैठक हुई थी, उसमें दो मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल थे। जिसमें यूपी में बाबा और भाजपा में दलितों की भागीदारी करना। बैठक के दौरान संघ प्रमुख ने भाजपा के राम माधव के साथ 16 जुलाई 2016 को बाबा के नाम पर मुहर लगा दी थी। चुनाव के दौरान भाजपा संघ के एजेंटे के तहत जमीन पर काम किया। जिसका फल भी भाजपा को मिला। गैर जाटव दलित काफी तादाद में भाजपा के पक्ष में मतदान किया। साथ ही चुनाव के दौरान बाबा की कई ताबड़तोड़ रैलियां करवाई गई। कई प्रत्याशी भी योगी आदित्यनाथ की रैलियां ज्यादा से ज्यादा कराए जाने की डिमांड की थी।

यह है यूपी के नए सीएम का बायडॉटा

योगी आदित्यनाथ का जन्म उत्तराखंड के गढ़वाल जिले में 5 जून 1972 को हुआ था। वह 1993 में गांव से भागकर गोरखपुर आ गए और यहीं पर गोरखपुर मंदिर क महंत अवैधनाथ के साथ रहने लगे। योगी आदित्यनाथ 1998 में पहली बार गोरखपुर से भाजपा के चुनाव चिन्ह से सांसद चुने गए। वह लगातार पांच बार यहीं से सांसद चुने गए। इनका वास्तुविक नाम अजय सिंह हैं। यह भारत की संसद में सबसे कम उम्र के सांसद थे, जो चुनकर गए। बाबा ने 2002 में हिन्दू युवा वाहिनी का गठन किया था।

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