ईसाई मिशनरियां तेजी से हिंदुओं का कर रही है धर्म परिवर्तन, खुली पोल तो हुआ जमकर हुआ हंगामा

बिजनौर : उत्तर प्रदेश में जहां चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्माया हुआ है, वहीं जनपद के अफजलगढ़ क्षेत्र के दल्लीवाला गांव में कल धर्म परिवर्तन मामले में एक बार फिर से जमकर हंगामा हुआ। हिन्दू वाहनी संगठन ने गांव पहुंचकर ईसाई धर्म के लोगों पर रुपयों का लालच देकर हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन मामले में जमकर विरोध किया।

बता दे कि ईसाई मिशनरियां देश के पिछड़े इलाकों में जकात लोगों को पढाई, इलाज, पैसे, चमत्कार आदि का झांसा देकर नित्य हिंदुओं को ईसाई बना रही है। मिशनरियां प्राय: बिना पर्याप्त जानकारी के भारतीय धर्म की अनुचित आलोचना करती आई है।

बिजनौर में ऐसा ही एक मामला सामने आया है। हिन्दू वाहनी संगठन के मंडल अध्यक्ष एनपी सिंह समेत कई पदाधिकारी ग्रामीणों की सूचना पर गांव पहुंच गए और ईसाई धर्म के लोगो पर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाया है। हिन्दू वाहनी संगठन के लोगों का कहना था कि रुपयों का लालच देकर ईसाई धर्म के लोग हिन्दू को धर्म परिवर्तन करने के लिए कह रहे हैं।

इसको लेकर गांव में काफी देर तक ईसाई धर्म के लोगों और हिन्दू वाहनी संगठन में गहमा-गहमी का माहौल बना रहा। उधर धामपुर कोतवाल राज कुमार शर्मा ने बताया कि हमें दोनों तरफ से कोई भी तहरीर नहीं मिली है। हालांकि इस सूचना पर पहुंची डायल 100 पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर मामला शांत करा दिया था।

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तीन वर्ष पहले भी हुआ था विरोध :

धर्मांतरण के मामले को लेकर तीन साल पहले भी इस गांव में जमकर हंगामा हुआ था जिसके बाद यहां ईसाई धर्म प्रचार बंद हो गया था। कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि तीन साल पहले भी मिशनरी से जुड़े ईसाई धर्म के प्रचारकों की सक्रियता के चलते यहां बेहद गोपनीय तरीके से बड़ी संख्या में लोगों का धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास किया गया था।

देश में कब शुरू हुई ईसाई मिशनरियां :

ईसाई मिशनरियों ने धर्मप्रचारक का अपना काम भारत में सोलहवीं शताब्दी के दौरान संत फ़्राँसिस जैवियर के ज़माने से शुरू किया था। संत जैवियर का नाम आज भी भारत के अनेक स्कूल कॉलेज से सम्बद्ध है। पुर्तग़ालियों के भारत आने और गोवा में जम जाने के बाद ईसाई पादरियों ने भारतीयों का धर्म-परिवर्तन करना शुरू कर दिया। आरम्भिक ईसाई मिशन रोमन कैथोलिक चर्च द्वारा प्रवर्तित थे और वे छुटपुट रूप से भारत आये। लेकिन उन्नीसवीं शताब्दी एग्लिंकन प्रोटेस्टेट चर्च के द्वारा ईसाई धर्म प्रचार का कार्य सुव्यवस्थित ढंग से आरम्भ किया। इस काल में ईस्ट इंडिया कम्पनी ने ईसाई मिशनरियों को अपने राज्य के भीतर रहने की इजाज़त नहीं दी, क्योंकि उसे भय था कि कहीं भारतीयों में उनके विरुद्ध उत्तेजना न उत्पन्न हो जाए। फलस्वरूप विलियम कैरी सरीखे प्रथम ब्रिटिश प्रोटेस्टेट मिशनरियों को कम्पनी को क्षेत्राधिकार के बाहर श्रीरामपुर में रहना पड़ा। अथवा कुछ मिशनरियों को कम्पनी से सम्बद्ध पादरियों के रूप में सेवा करनी पड़ी। जैसा कि डेविड ब्राउन और हेनरी मार्टिन ने किया।

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