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माज हत्याकांड में पुलिस इंस्पेक्टर समेत सात लोगों को उम्र कैद

माज हत्याकांड में पुलिस इंस्पेक्टर समेत सात लोगों को उम्र कैद
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लखनऊ। राजधानी के चर्चित माज हत्याकांड में अदालत ने पुलिस इस्पेक्टर संजय राय समेत सात लोगों को शुक्रवार को उम्र कैद की सजा सुनाई है। यह सजा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष न्यायाधीश स्वप्ना सिंह की अदालत ने सुनाई। इससे पहले अदालत ने बुधवार को संजय राय, रामबाबू उर्फ छोटू, अजीत राय उर्फ सिन्टू, संदीप राय व राकेश कुमार सोनी को आईपीसी की धारा 302 सपठित धारा 120बी, जबकि अभियुक्त सुनील कुमार सैनी उर्फ पहलवान व राहुल राय को आईपीसी की धारा 449, 302 सपठित धारा 34 में दोषी करार दिया था। उन्होंने अभियुक्त सुनील कुमार सैनी उर्फ पहलवान को आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 में भी दोषी ठहराया था।

अदालत ने कहा था कि आरोपित संजय राय ने ही माज की एक रिश्तेदार महिला के साथ अपने असफल प्रेम प्रसंग के कारण अन्य अभियुक्तों के साथ साजिश रचकर उसकी हत्या कराई है। इसके अलावा अन्य आरोपितों को भी दोषी पाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त, 2019 में अभियुक्त संजय राय की एक अर्जी पर इस मामले का विचारण छह माह में पूरा करने का आदेश दिया था। इस मामले की विवेचना में संजय राय समेत आठ अभियुक्तों का नाम प्रकाश में आया था।

एक अभियुक्त अजीत कमार यादव उर्फ बंटी फरार चल रहा है। इसकी पत्रावली अलग कर दी गई है। उसके खिलाफ कुर्की का आदेश जारी है। 29 मई 2013 को इंदिरानगर के फरीदीनगर इलाके में 14 वर्षीय माज की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। माज की बुआ हुस्न बानो ने अज्ञात लोगों के खिलाफ थाना इंदिरानगर में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया कि 14 वर्षीय माज अहमद सिद्दीकी घर में टीवी देख रहा था। रात 10:30 बजे तीन लोग एक मोटरसाइकिल से आए।

हुस्न बानो के मुताबिक उनके दूसरे भतीजे फैजान सिद्दीकी के दरवाजा खोलते ही तीनों घर में दाखिल हुए और चन्द पलों में माज पर गोलियां चला दीं। ट्रॉमा सेंटर ले जाने पर माज को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के वक्त इंस्पेक्टर संजय राय लखनऊ ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल का प्रभारी था। संजय ने अपने प्रभाव में विवेचना को भटकाने की कोशिश की। उसने बार-बार अकमल नाम के व्यक्ति का नाम लेते हुए हत्याकाण्ड में उसके शामिल होने का आरोप लगाया, लेकिन जांच में अकमल बेगुनाह पाया गया।

वहीं संजय राय की कॉल डिटेल ने सारी पोल खोल दी। खुलासा हुआ कि संजय ने वाराणसी जेल में बंद अपराधी के जरिए आजमगढ़ के शूटरों को सुपारी दी थी। बाद में शूटर धर दबोचे गए। वहीं फरार संजय ने पुलिस को चकमा देते हुए वकील के कपड़े पहनकर कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था। बाद में उसे पद से बर्खास्त कर दिया गया। हालांकि हाईकोर्ट ने उसकी अर्जी पर बर्खास्तगी के आदेश निरस्त कर दिया था। इसके बाद उप्र पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे ले लिया।

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