अयोध्या जन्मभूमि विवाद : शिया वक़्फ़ बोर्ड के हलफनामे से नया मोड़

अयोध्या विवाद में अचानक शिया वक़्फ़ बोर्ड ने एक खलबली पैदा कर दी है. शिया वक़्फ़ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर दावा किया है कि सितंबर  2010 में आये इलाहबाद हाई कोर्ट  के निर्णय के अनुसार विवादित जगह के एक तिहाई हिस्से पर हक़ उसका है न कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड का  अपने हलफनामे में शिया वक़्फ़ बोर्ड ने यह भी कहा है बोर्ड एक तिहाई जगह पर अपना दावा छोड़ सकता है तथा विवादित जगह से कुछ दूर मुस्लिम आबादी में मस्जिद बनाई जा सकती है. लेकिन इसके लिए जरूरी यह है कि सरकार दूसरी जगह मस्जिद बनाने के लिए जगह दे.

ज्ञात हो सितम्बर 2010 में आये फैसले के अनुसार हाई कोर्ट ने अयोध्या में विवादित स्थल को तीन बराबर भागों में बांटकर एक हिस्सा जहाँ रामलला विराजमान हैं वह हिस्सा रामलला विराजमान को तथा जिस हिस्से में सीता रसोई  और राम चबूतरा बना है उस हिस्से को निर्मोही अखाडा को दे दी जाये इसके अतिरिक्त तीसरे बचे हिस्से को सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को दे दिया जाये.

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शिया वक़्फ़ बोर्ड ने अपने हलफनामे में दावा किया है कि विवादित जगह पर हक़ शिया वक़्फ़ बोर्ड का है न कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड का  अपने दावे के पक्ष में शिया बोर्ड का कहना है कि बाबरी मस्जिद मीर बांकी ने बनवाई थी और मीर बांकी एक शिया थे. शिया बोर्ड ने यह भी कहा है कि विवाद का समाधान सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड शांतिपूर्ण तरीके से नहीं चाहता है. शिया बोर्ड ने मामले को मिलबैठकर सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के रिटायर्ड जजों, प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी और पक्षकारों की एक कमेटी बनाने की भी मांग की है.

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