विकास दुबे एनकाउंटर की जांच के लिए गठित आयोग में अब नहीं होगा कोई बदलाव सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली: कानपुर कांड के मुख्य आरोप विकास दुबे के एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट की स्वीक्रति से जाो जांच कमेटी गठित की गयी है अब उसमे कोई बदलाव नही होगा। सुप्रीम कोर्ट ने जांच आयोग के दो सदस्यों को हटाने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। बता दें कि हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज शशिकांत अग्रवाल और पूर्व डीजीपी के एल गुप्ता को भी जांच आयोग में रखा गया है, इन्ही को जांच कमेटी से हटाए जाने की मांग की गयी थी। एनकाउंटर मामले की जांच की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं अनूप अवस्थी और घनश्याम उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच आयोग के पुनर्गठन की मांग की थी।

याचिकाओं में कहा गया था कि के एल गुप्ता ने एनकाउंटर के तुरंत बाद पुलिस के पक्ष में बयान दिया था, चूंकि वो एनकाउंटर को लेकर पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं। उनको जांच आयोग में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। घनश्याम उपाध्याय ने अपनी याचिका में कहा था कि जस्टिस शशिकांत अग्रवाल ने विवादित हालात में हाईकोर्ट जज का पद छोड़ा था। जस्टिस शशिकांत अग्रवाल को आयोग से हटाने की मांग को मुख्य न्यायाधीश ने सीधे तौर से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि हम इस मांग पर कुछ नहीं कर सकते।

सुनवाई के शुरू होते ही मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस ए बोबडे ने के एल गुप्ता के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पूर्व DGP ने पूरी दुनिया के लिए एक टिप्पणी की है, इसकी सराहना नहीं की जा सकती। हमें राज्य सरकार से जवाब चाहिए। लेकिन बाद में जब उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि गुप्ता ने जो बयान दिया था उसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं कहा था।

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उन्होंने केवल ये कहा था कि एनकाउंटर पर सवाल नहीं उठाना चाहिए। जांच होनी चाहिए और जांच में एनकांउटर में शामिल पुलिस वाले दोषी पाते जाते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। पूर्व डीजीपी के पूरा बयान पढ़ने के बाद मुख्य न्यायाधीश ने यकचिककर्ता से कहा कि ‘हम शुरू में हम आपके (याचिकाकर्ता) साथ थे, लेकिन ऑफिसर ( केएल गुप्ता) ने कहा है कि यदि जांच के बाद पुलिस वाले दोषी पाए जाते हैं तो उसे उन्हें दंडित किया जाएगा। उनका बयान संतुलित था।’

जांच आयोग के सदस्यों के बदलने की मांग पर टिप्पणी करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जांच आयोग में 3 सदस्य हैं। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की देखरेख में जांच होगी। केवल एक सदस्य के नाम पर आपत्ति को लेकर जांच आयोग को नकारा नहीं जा सकता। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने विकास दुबे एनकाउंटर मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बीएस चौहान की अध्यक्षता में एक जांच आयोग का गठन किया है। जांच आयोग को दो हफ्ते में जांच पूरी करने को कहा गया है।

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