योगी सरकार देने जा रही है एक और बड़ी राहत, जल्द होने वाला है एलान!

लखनऊ :  बिजली कंपनियों के भारी घाटे में होने के बावजूद यूपी की योगी सरकार बकायेदारों का लगभग 19 हजार करोड़ रुपए सरचार्ज माफ करने की तैयारी में है। नियमित बिल का भुगतान न करने वालों को हतोत्याहित करने और ईमानदार उपभोक्ताओं के हितों का ख्याल रखते हुए विद्युत नियामक आयोग ने दो साल पहले एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) पर रोक लगा दी थी।

अब एमनेस्टी स्कीम के नाम से बकायेदारों का पूरा का पूरा सरचार्ज माफ करने की विद्युत नियामक आयोग में मंजूरी मांगी गई है। दिलचस्प बात यह है कि इस बार इसका दायरा भी बढ़ा दिया गया है। स्कीम में गांव से लेकर शहरों तक के घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ बकायेदार बड़ कमर्शियल, औद्योगिक, नए और पुराने सभी उपभोक्ताओं को इसका फायदा देने का प्रस्ताव है। परीक्षण के बाद आयोग अगले सप्ताह तक कुछ संसाधनों के साथ इसे मंजूरी दे सकता है।

बकाया वसूल करने के लिए होगा सरचार्ज माफ

प्रदेश में सभी श्रेणियों को मिलाकर लगभग 1.75 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं। ग्रामीण और शहरी घरेलू उपभक्ताओं के अलावा बड़े कॉमर्शियल और औद्योगिक उपभक्ताओं पर भी भारी बिजली का बिल बकाया है। सूत्रों के मुताबिक सभी श्रेणियों पर कुल बकाया 35 हजार करोड़ रुपए के आसपास है जिसमें सरचार्ज की रकम करीब 19 हजार करोड़ रुपए है। एमनेस्टी स्कीम के पीछे अफसरों का तर्क है कि इससे मूल बकाया वसूल हो सकेगा।

कॉर्पोरेशन से मांगी गई जानकारी

नियामक आयोग ने एमनेस्टी स्कीम के प्रस्ताव पर कॉर्पोरेशन से जानकारी मांगी है कि किस श्रेणी के कितने उपभोक्ताओं पर कितनी मूल राशि व कितना सरचार्ज बकाया है। आयोग ने बकाया अवधि को लेकर भी जानकारी मांगी है। आयोग ने यह भी पूछा है कि स्कीम लागू करने से कितमा पिछला बकाया जमा होने की संभावनी है।

सरकार पर पड़ेगा बोझ

बिजली बकायेदारों के सरचार्ज माफी के लिए एमनेस्टी स्कीम को लागू करने से सरकार पर वित्तीय बोझ और बढ़ेगा। दरअसल बिजली कंपनियों के 2015 से पहले के लगभग 54 हजार करोड़ रुपए के घाटे के 75 फीसदी हिस्से यानी करीब 41,500 करोड़ रुपए का दायित्व राज्य सरकार केंद्र सरकार की उज्जवल डिस्कॉम एश्योरेंश योजना (उदय) के तहत पिछले साल अपने ऊपर ले चुकी है। उदय योजना के तहत 40,451.30 करोड़ रुपए के बांड पर सरकार को सालाना 3000 करोड़ रुपए से ज्यादा का ब्याज भी देना पड़ रहा है।

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अब सरचार्ज माफी के बाद बिजली कंपनियों को होने वाले घाटे का दायित्व भी राज्य सरकार को अपने ऊपर लेना पड़ सकता है। हालांकि अभी देखने वाली बात यह होगी कि आयोग प्रस्तावित स्कीम में कितना संसोधन करता है और वास्तविक रूप से बिजली कंपनियों को कितना घाटा उठाना पड़ सकता है। जानकारों की मानें तो बीते दो साल से घरेलू बिजली की दरें बढ़ी नहीं हैं। इसलिए थोड़ी बहुत वृद्धि करके घाटों की कुछ भरपाई हो सकती है लेकिन सरचार्ज माफी के एवज में एक बड़ी राशि का बोझ सरकारी खजाने पर आ सकता है।

ईमानदार उपभोक्ताओं को भी हो फायदा

नई सरकार आने के बाद एमनेस्टी स्कीम के लिए दाखिल याचिका को लेकर आयोग पसोपेश में है। दरअसल ओटीएस के चक्कर में नियमित रूप से बिल जमा न करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए आयोग ने 2015 के टैरिफ ऑर्डर में साफ कर दिया था कि भविष्य में ओटीएस को मंजूरी नहीं दी जाएगी। इसके बाद भी चुनाव को देखते हुए बीते साल बिना आयोग के मंजूरी के ही ग्रामीण व कृषि उपभोक्ताओं के लिए ओटीएस लागू कर दी गई। अब एमनेस्टी स्कीम ने आयोग की चिंता बढ़ा दी है। आयोग चाहता है कि अगर डिफाल्टर को फायदा मिल रहा है तो ईमानदार उपभोक्ताओं को भी इसी अनुपात में कुछ फायदा देने का रास्ता निकाला जाना चाहिए। एमनेस्टी स्कीम को मंजूरी देने से पहले आयोग यह भी सुनुश्चित करने में लगा है कि सरचार्ज माफी का बोझ उन उपभोक्ताओं पर कतई न पड़े जो नियमित भुगतान कर रहे हैं। आयोग कॉर्पोरेशन से यह आश्वासन चाहता है कि सरचार्ज माफी से होने वाले घाटे की भरपाई किसी भी रूप में ईमानदार उपभोक्ताओं के जरिये नहीं की जाएगी।

ईमानदार उपभोक्ताओं का ख्याल

राज्य विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन देश दीपक वर्मा के मुताबिक बिजली के पुराने बकाये की वसूली के लिए पावर कॉर्पोरेशन की ओर से एमनेस्टी स्कीम को मंजूरी देने की याचिका दायर की गई है। आयोग अभी इसका परीक्षण कर रहा है। पावर कॉर्पोरेशन से कुछ सूचनाएं मांगी गई हैं। सभी पहलुओं का गहन अध्ययन करने के बाद अगले सप्ताह तक आयोग इस पर फैसला करेगा। आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि ईमानदार उपभोक्ताओं पर स्कीम का कोई खराब असर न हो।

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