उत्तर प्रदेश: क्या आपको याद हैें बीजेपी के ये चेहरे, कभी थी धाक, अपनी सरकार में हुए बेगाने

लखनऊ। आज केन्द्र और यूपी में भाजपा की प्रचंड बहुमत की सरकार है। यूपी में तो हर तीसरी कार में बीजेपी का झंडा लगाकर लोग नेतागीरी कर रहे हैं। लेकिन विडम्बना देखिये कि भगवा दल को इस मुकाम पर पहुंचाने वाले दिग्गज इस समय पूरी तरह से उपेक्षित हैं।

राम मंदिर आंदोलन से देशभर में पहचान बनाने वाले फायर ब्रांड नेता विनय कटियार, बड़े ओबीसी नेता ओमप्रकाश सिंह और डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी बीजेपी के यूपी अध्यक्ष रहे। जमीन से जुड़े इन नेताओं ने बुरे समय में कठिन परिश्रम से पार्टी को मजबूती दी। जिस कारण पार्टी ने सफलता की नई उंचाईयों को छुआ। इन तीनों नेताओं का रसूख विपक्षी दलों की सरकारों में भी खूब चला लेकिन अपनी पार्टी की सरकार में इनका पुरसाहाल लेने वाला कोई नहीं।

2014 के लोकसभा चुनाव के समय डा लक्ष्मीकांत वाजपेयी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे। उस समय प्रदेश में समाजवादी पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार थी। सूबे भाजपा की हालत न तो सदन में मजबूत थी और न ही उसके पास ऐसे कार्यकर्ता बचे थे जो सड़कों पर उतरकर संघर्ष करते। महज 38 विधायकों वाली पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेई के आगे अखिलेश यादव की सरकार हमेशा असहज रही। डा लक्ष्मीकांत वाजपेयी की जीवटता ही थी कि उनके नेतृत्व में विधानसभा के सामने पार्टी विधायकों के 24 घंटे के धरने ने सपा सरकार को हिलाकर रख दिया था। उनके नेतृत्व में ही पार्टी को 2014 के लोकसभा चुनाव में 71 और एनडीए को 73 रेकॉर्ड लोकसभा सीटें मिली थीं। 2017 का विधानसभा चुनाव हारने के बाद डा लक्ष्मीकांत वाजपेयी भाजपा के लिए बेगाने हो गए। राजधानी तो छोड़िए उनके खुद के शहर मेरठ में उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।

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अयोध्या आंदोलन से उभरे फायर ब्रांड नेता विनय कटियार की कभी पूरे प्रदेश में तूती बोलती थी। अटज और अडवाणी के युग में उनकी दिल्ली में भी खूब चलती थी। इसी के चलते वह तीन बार लोकसभा सदस्य रहे। हालांकि विनय कटियार को राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने पर फिर से उच्च सदन नहीं भेजा गया।
उम्मीद थी कि विनय कटियार को 2019 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद से टिकट दिया जाएगा लेकिन पार्टी नेतृत्व ने ऐसा नहीं किया। पार्टी में पूरी तरह से उपेक्षित विनय कटियार की सुरक्षा में पिछले साल नवम्बर में कटौती की कर दी गयी।

कुर्मी बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले दिग्गज नेता ओमप्रकाश सिंह 2012 में अपनी परम्परागत विधानसभा सीट चुनार (मिर्जापुर) से चुनाव हार गए। 2014 के लोकसभा चुनाव में मिर्जापुर सीट गठबन्धन के चलते अपना दल की अनुप्रिया पटेल को दे मिल गयी। अनुप्रिया पटेल चुनाव जीतकर सांसद बन गयी। 2017 के विधानसभा चुनाव में चुनार सीट पर ओमप्रकाश के बेटे अनुराग सिंह को टिकट दिया, अनुराग सिंह विधायक तो बन गए पर ओमप्रकाश सिंह पार्टी के लिए बेगाने हो गए।

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