क्या यूपी के 2022 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मुद्दे पड़ेंगे भारी, प्रियंका की एंट्री ​का क्या रहेगा असर

लखनऊ: यूपी में बीते 2017 विधानसभा चुनाव में हुई करारी हार के बाद कांग्रेस ने महासचिव प्रियंका गांधी को मैदान में उतारा, प्रियंका ने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के अंदर जो जोश भरा है उससे कांग्रेस की कुछ उम्मीदे जगी हैं. लेकिन यूपी में कांग्रेस की राजनैतिक हैसियत क्या है? इसका अंदाजा तो आप विधानसभा और लोकसभा चुनावों को ही आधार मान कर देख सकते हैं. वर्तमान समय में सिर्फ 7 विधायकों वाली ये पार्टी पिछले कई सालों से यूपी में बस जिंदा है. लेकिन, अब हालात बदलते दिख रहे हैं. कांग्रेस को लेकर राजनीतिक विशेषज्ञ बड़े दावे कर रहे हैं, उनका मानना है कि यूपी के 2022 के विधानसभा चुनाव में शायद यही वो पार्टी है, जो इलेक्शन का एजेंडा सेट करेगी. यानी इस पार्टी के उठाये मुद्दे चुनाव में हावी रहेंगे.

हालांकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी कांग्रेस से कहीं ज्यादा यूपी की सत्ता में भारी रही हैं लेकिन कांग्रेस इस बार उनसे भी आगे जाते हुए दिख रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि मुख्य विपक्षी की भूमिका में तेजी से कांग्रेस आगे आ रही है, प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू के अंदर नेत्रत्व को बदलने की क्षमता दिख रही है ओर बड़े नेताओं की बात करें तो प्रियंका गांधी भी सड़कों पर उतरकर संघर्ष करती दिखाई दे रही हैं.

प्रियंका के सवालों पर सीएम को देना पड़ता है जवाब

अक्सर देखा गया है कि प्रियंका गांधी छोटे छोटे मुद्दे उठाकर बड़ी बात कर देती हैं और सरकार से ऐसा सवाल करती हैं जिसका सरकार तोड़ मतोड़कर जवाब देती नजर आती है. प्रियंका के सवाल में इतनी दमखम होती है कि उसका जवाब सीएम योगी आदित्यनाथ को ही देना पड़ता है. जाहिर है प्रियंका पावरफुल वॉयस हैं. ये महत्वपूर्ण नहीं है कि आपके पास वोट कितने हैं. अहम ये है कि आप कौन हैं. प्रियंका के सवालों पर कई बार सरकार से टकराव भी होता है लेकिन फिर भी उन्हें सरकार की ओर से जवाब तो दिया ही जाता है.”

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प्रियंका जिन मुद्दो को छेड़ देती हैं वो बन जाते हैं सुर्खियां

2017 विधानसभा चुनाव के बाद ही कांग्रेस ने यूपी की कमान प्रियंका गांधी के हाथो में दे दिया था. प्रियंका ने मैदान में उतरते ही छोटे छोटे मुद्दे उठाना शुरू कर दिया, वो जो भी मुद्दा उठाती हैं उस पर प्रदेश में बहस छिड़ जाती है. इसके अलावा उन्होंने दर्जनों मुद्दों पर सीएम योगी आदित्यनाथ को चिट्ठियां भी लिखीं. सिर्फ आरोप ही नही बल्कि उन्होने सीएम को पत्र लिखकर सुझाव भी दिये हैं. बुनकरों और मनरेगा कामगारों के मुद्दों पर उनकी सलाह पर सरकार ने सकारात्मकता दिखाई तो लॉक डाउन के समय प्रवासी मजदूरों के लिए बसों के मामले पर उनसे जबरदस्त टकराव भी हुआ. उनके इस कदम में एक सकारात्मक विपक्ष की छवि देखी जाने लगी है.

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