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ग्लोबल गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित होंगे देश विदेश के युवा: वंदना शुक्ला

कार्यक्रम से पूर्व विश्वभर के युवा लेंगे शांति फैलाने की शपथ

दिशा फाउंडेशन चेयरपर्सन वंदना शुक्ला ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, ग्लोबल गांधी शांति पुरस्कार यादगार बनेगा। इससे पहले भी हम स्वर्ण भारत परिवार के साथ एक मंच पर सेवानीति करते हुए दिखे हैं। स्वर्ण भारत परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीयूष पण्डित वंदना शुक्ल के कार्यों से प्रभावित हैं।

पियूष पंडित का कहना है कि दिशा फॉउंडेशन के साथ कार्यक्रम करना हमारे लिए गर्व की बात होती है, आगामी 2 अक्टूबर को विश्वशान्ति के अग्रदूत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयन्ती के अवसर पर स्वर्ण भारत परिवार के अध्यक्ष पियूष पंडित व दिशा फॉउंडेशन की अध्यक्षा वंदना शुक्ला ने अंतर्राष्ट्रीय युवा विकास और वैश्विक गांधी शांति पुरस्कार व शिखर सम्मेलन का आयोजन करने के साथ साथ विश्व के कोने-कोने से युवाओं के विकास के लिए एवं विश्व शांति के लिए कार्य कर रहे युवाओं को गूगल मीट पर ग्लोबल गांधी पीस पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की है। जिसमें युवाओं की समस्याओं और उनके विकास पर चर्चा के साथ-साथ विश्व के विशिष्ट 51 युवाओं को इस क्षेत्र में काम करने के लिए सम्मानित किया जाएगा।

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स्वर्ण भारत पुरस्कार चयन समिति की अध्यक्षा डॉ राधा वाल्मीकि, सदस्य कंचन शर्मा, अनिता देवी व राजस्थान प्रदेश मुखिया पूनम खँगारोत का कहना है क़ि किसी भी राष्ट्र के विकास में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। युवा शक्ति हर युग में और हर समाज में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है, आर्थिक विकास में यह एक वरदान है। भारत में युवा शक्ति की आबादी को सही दिशा व राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक योगदान हेतु कैसे मोड़ा जाए? यह एक ज्वलन्त और विचारणीय प्रश्न है। एक युवा में बढ़ती आयु के साथ-साथ नया रक्त संचार नया जोश, साहस और बढ़ती महत्वाकांक्षाऐं प्रबल होतीं हैं। ऐसे में इनमें सकारात्मक सोच उत्पन्न कर सही मार्गदर्शन द्वारा यदि सही दिशानोन्मुख कर दिया जाय तो उनकी ऊर्जा मानव विकास और राष्ट्र कल्याण में लगाई जा सकती है। परन्तु आज एक बड़ा युवा वर्ग अवसादग्रस्त होकर डिप्रेशन का शिकार हो रहा हैं। पढ़ाई का बोझ, गलत संगति, बेरोजगारी, प्रेम में विफलता, जिम्मेदारियों का बोझ, आर्थिक तंगी, शारीरिक बीमारियां, अचानक आ जाने वाली परेशानियां, प्रिय जनों से बिछड़ना अपराध आदि यह युवा जीवन की गंभीर समस्याएं बन चुकी है। जिनका सामना करते करते वह परेशानियों के आगे घुटने टेक देता है और मानसिक विकारों का शिकार होकर या तो आत्महत्या कर लेता है या डिप्रेशन में जाकर नशे का आदी हो जाता है। उसकी सोचने समझने की क्षमता प्रभावित होने लगती है या फिर उसके कदम अपराध जगत की ओर बढ़ने लगते हैं। ऐसे समय में डिप्रेशन के शिकार इन युवाओं को उनकी पीड़ा को समझना बहुत जरूरी है।

आज का युवा आभासी दुनिया में भी जीने लगा है, आज वह सोशल मीडिया इंटरनेट इत्यादि में उलझ कर अपने वास्तविक संसार से अलग हो गया है और अपनी नई दुनिया में जी रहा है। ऐसे में स्वर्ण भारत परिवार और पीयूष पंडित एक नई सोच लेकर इनमें ऊर्जा का संचार कर रहे हैं। स्वर्ण भारत परिवार के अध्यक्ष पीयूष पंडित ने जिस तरह से अपनी विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष करते हुए आज भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में अपना एक मुकाम हासिल कर मिसाल कायम किया है वह अनुकरणीय है। उनकी सोच इन युवाओं को आगे बढ़ाने की है और इसी सोच को ध्यान में रखते हुए पीयूष पंडित समय-समय पर देश में कुछ न कुछ नए कार्य करते रहते हैं। अब उन्होंने 2 अक्टूबर गांधी जयंती को युवाओं को समर्पित किया है ताकि युवाओं को एक नई दिशा और प्रेरणा मिल सके और उनमें एक नए उत्साह का संचार हो। ऐसे मे पीयूष पंडित जैसे ही जागरूक युवाओं को इन समस्याओं से निजात पाने की मुहिम में आगे आना होगा, उनमें सकारात्मक सोच विकसित करनी होगी। इसी लिए स्वर्ण भारत परिवार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं को सम्मानित कर उनकी समस्याओं पर मंथन करने के लिए दो अक्टूबर को गूगल मीट पर पुरस्कारों के साथ वैश्विक शिखर सम्मेलन करने जा रहा है जिसमें कई देश अपनी भागीदारी करेंगे।

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