अमेरिका और चीन के बीच ताइवान को लेकर तनातनी का माहौल

वाशिंगटन। ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनातनी का माहौल अपने चरम पर है। सत्‍ता परिवर्तन को लेकर सियासी संकट के बीच अमेरिका ने चीन को खुली चेतावनी देते हुए वायु रक्षा क्षेत्र में बमवर्षक विमान भेज कर उसे सावधान किया है। अगर,चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो अमेरिकी सेना की क्षमता उसके घर के अंदर घुसकर मारने की हैं। दोनों देशों के बीच तनाव को देखते हुए नए शीत युद्ध के साफ संकेत मिल रहे है।

दरअसल, चीन ने हमेशा ही ताइवान को अपने एक प्रांत के रूप में देखा है,जो उससे अलग है। इसके संघर्ष का मूल कारण यही है। हालांकि,समय-समय पर ताइवान ने चीन के साथ व्‍यापारिक संबंधों को बेहतर बनाने के प्रयास भी किए हैं। परन्तु, वर्ष 1949 में चीन में चल रहे गृहयुद्ध के अंत में चाइना के संस्‍थापक माओत्‍से तुंग ने पूरे चीन पर अपना अधिकार कर लिया। जिस कारण ताइवान ने अमेरिका से मदद ली। 1950 में अमेरिका ने जंगी जहाज का सातवां बेड़ा ताइवान और चीन के बीच पहरेदारी के रुप में भेजा। ताइवान एक राष्‍ट्र न होते हुए भी अपनी एक सरकार रखता है। उसका अपना राष्‍ट्रपति अपनी मुद्रा के साथ ही अपनी एक सेना है। इनसे बावजूद भी ताइवान को संपूर्ण राष्‍ट्र का दर्जा हासिल नहीं है।

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