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कैथोलिक धर्मगुरू पोप फ्रांसिस ने भोजन और सेक्स को बताया ‘दिव्य’ आनंद

नई दिल्ली। कैथोलिक चर्च के प्रगतिशील धर्मगुरू पोप फ्रांसिस ने कहा है कि सेक्स और भोजन ऐसा ‘दिव्य’ आनंद है, जो सीधा परमात्मा से पहुंचता है। पोप फ्रांसिस ने लेखक कार्लो पेट्रिनी की किताब TerraFutura के लिए दिए एक इंटरव्यू में ये बात कही। पोप ने कहा भोजन और सेक्स पर चर्च के अतीत में दिए विचारों की निंदा करते हुए कहा इसे अत्यधिक नैतिकता करार दिया, जिसने “बहुत नुकसान पहुँचाया, जो आज भी दृढ़ता से महसूस किया जा सकता है।”

पोप फ्रांसिस ने कहा कि खाने का आनंद आपको स्वस्थ रखने के लिए है, ठीक उसी तरह जैसे कि यौन सुख प्यार को और अधिक सुंदर बनाने और स्पीशिज को जारी रखने की गारंटी देने के लिए है। उन्होंने आगे कहा कि इसके विपक्षी विचारों ने बहुत नुकसान पहुंचाया है, जिसे आज भी कुछ मामलों में महसूस किया जा सकता है। उन्होंने कहा खाने का आनंद और यौन सुख ईश्वर से मिलता है।

पोप फ्रांसिस का सेक्स के प्रति दृष्टिकोण धीरे-धीरे वर्षों में विकसित हुआ है। साल 2016 में उन्होंने सेक्स के आनंद को स्वीकार किया और कहा कि विवाहित जोड़ों को अपनी शादी के दौरान उस आनंद को बरकरार रखने करने की आवश्यकता है। 2018 में उन्होंने युवा फ्रांसीसी लोगों से सेक्स को आजीवन एक पुरुष और एक महिला के बीच भावुक प्रेम का संकेत बताया था।

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दुनिया भर में रहने वाले 1.3 बिलियन कैथोलिकों के धर्म गुरू फ्रांसिस ने आनंद पर अपने मैसेज को रिफ्लेक्ट करने के लिए 1987 की डेनिश फिल्म “बैबेट्स फेस्ट” को गुनगुनाया। यह फिल्म 19वीं शताब्दी में लॉटरी जीतने वाले शेफ की कहानी है जो अल्ट्रा-प्यूरिटन प्रोटेस्टेंट उपासकों के एक ग्रुप को एक शानदार भोज में आमंत्रित करता है।

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