तिब्बत और शिनजियांग में लगातर सैन्य ताकत बढ़ा रहा है ड्रैगन, जानें वजह

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में कई महीनों से जारी सीमा विवाद के बीच चीन तिब्बत और उसके आसपास के क्षेत्रों में सैन्य ताकत बढ़ा रहा है। इसके साथ ही ड्रैगन लगातार नागरिक सुविधाओं के निर्माण और विस्तार में भी जुटा है। चीन ने एलएसी के पास एयरबेस, एयर डिफेंस पॉजिशन्स और हेलीपोर्ट्स की संख्या दोगुनी से अधिक कर दी थी।

इस बीच लद्दाख , भूटान और अरुणाचल प्रदेश के विवादित सीमा क्षेत्रों के साथ ही पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बिल्ड अप और नागरिक सुविधाओं के निर्माण के सबूत बढ़ते जा रहे हैं। चीन ने यहां गांवों के निर्माण करने का एक व्यापक अभियान शुरू कर रखा है। इसके साथ ही चीन ने तिब्बत के प्रमुख शहरों और सैन्य केंद्रों के बीच संपर्क को बेहतर बनाने के लिए और सैनिकों और लॉजिस्टिक्स को कम समय में पहुंचाने के लिए काफी काम किया है।

चीन ने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की राजधानी के मुख्य एयरपोर्ट ल्हासा गोंगगर हवाई अड्डे पर सैन्य सुविधाओं में कई सुधार किए हैं। इसमें सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल साइट, एयर डिफेंस सिस्टम के लिए एक साइट, एयरफोर्स के लिए सपोर्ट साइट, फाइटर जेट्स के लिए शेल्टर्स आदि को रिनोवेट करना या फिर निर्माण करना शामिल है। वहीं, ल्हासा एयरपोर्ट में भी सुधार किया गया है।

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हॉटन एयरबेस में जे -11 और जे -20 लड़ाकू जेट्स, इलेक्ट्रॉनिक युद्धक विमान, एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल एयरक्राफ्ट्स और ड्रोन्स आदि हैं। इमेजरी से पता चलता है कि एयरबेस में पांच नए बंकर बनाए जा रहे हैं। पिछले साल मार्च में, चीन ने हॉटन और रुआकियांग को जोड़ने वाली 825 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन के लिए ट्रैक बिछाना शुरू किया था। इसका गोलमुद-कोरला रेलवे लाइन और किंघई-तिब्बत रेलवे लाइन के साथ जुड़ने की उम्मीद है।

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