एक चोर, जिसने जेल के दरवाजे से बाहर निकलकर बदल दी अनाथों की दुनिया

16 साल की उम्र में संगत बिगड़ने पर वह युवा एक नंबर का चोर और शराबी बन गया था। कोई ऐसी बुरी लत नहीं थी, जिसका शिकार न रहा हो। आए दिन दूसरों से मारपीट और छोटे-मोटे अपराधों से नाता जुड़ता रहा। मुहल्ले से शुरू हुई बदनामी जब बढ़ती गई तो परिवार ने ही नहीं बल्कि समाज ने भी नाता तोड़ दिया। परिवारवालों ने घर से निकाला और समाज ने बहिष्कृत कर दिया। एक बड़ी चोरी की घटना ने उसे सेंट्रल जेल चेन्नई पहुंचा दिया।

आप ताज्जुब करेंगे कि कभी चोरी में जेल जाने वाले इस व्यक्ति को समाजसेवा के लिए अब तक दर्जनों अवॉर्ड मिल चुके है। ये अवार्ड देश के अमीर नंबर वन मुकेश अंबानी, सचिन तेंदुलकर सहित कई सेलिब्रेटीज ओर से दिए गए हैं। आइए हम मिलाते हैं आपको बेंगलुरू के मशहूर ऑटो राजा से।

मगर इसके बाद जो हुआ, वह आपको चौंकने के लिए मजबूर कर देगा। अमूमन माना जाता है कि जेल जाने के बाद आपराधिक प्रवृत्ति के लोग सुधरते कम हैं बल्कि और खूंखार होकर निकलते हैं, मगर इस युवा के साथ जो हुआ, आपको सोचने के लिए मजबूर कर देगा। जेल से बाहर निकलने के बाद इस युवा का ऐसा हृदय परिवर्तन हो गया कि चोर से मानो संत हो गया। और वह युवा अनाथों का राजा बन गया। बेंगलुरु की गलियों में खुले आसमान के नीचे जो कभी रहते थे, आज उस शख्स की मदद से छत के नीचे रहते हैं। दो जून की रोटी भी मुफ्त मिलती है।

जेल से निकलने के बाद उस युवा ने नेकी के रास्ते पर चलने की कसम खाई। पैरों पर खड़ा होने के लिए ऑटो चलाना शुरू किया। बेंगलुरु की सड़कों पर ऑटो चलाने लगा। इसके बाद जो पैसा होता, उससे गलियों में इधर-उधर लावारिस पड़े लोगों को खाना खिलाने और पानी पिलाने के साथ कपड़े और बिस्तर की व्यवस्था करने लगा।

अब ऑटो राजा की मदद के लिए तमाम समाजसेवी लोग सामने आ रहे हैं। जिसे देखते हुए ऑटो राजा ने होप ऑफ होम्स नामक आश्रय गृह का संचालन शुरू कर दिया है। यही नहीं द न्यू आर्क मिशन ऑफ इंडिया संगठन बनाकर असहायों की मदद करने की मुहिम छेड़ रखी है। गलियों, फुटपाथ पर रह रहे लोगों को आश्रय गृह में रहने की व्यवस्था, उन्हें कपड़े देना, खाने-पीने की पूरी व्यवस्था ऑटो राजा करते हैं।

अतीत में एक अपराधी रहे शख्स की इस समाजसेवा को देख लोगों ने ऑटो राजा नाम रख दिया। सोशल मीडिया पर आज बेंगलुरु के लोग इस व्यक्ति को ऑटो राजा कहकर बुलाते हैं। ऑटो राजा अब तक बेंगलुरु की गलियों में लावारिस मिले 10 हजार से अधिक लोगों की सेवा कर उन्हें घर पहुंचाने से लेकर आश्रमों में रहने की व्यवस्था कर चुके हैं।

ऑटो राजा तीन दशक पहले का वाकया याद करते हैं- तब मैं छोटे-मोटे अपराध करता था।  एक अपराध में पकड़ा गया तो जेल चला गया। वहां जेल की अंधेरी सीखचों में कैद हुआ। एक शाम ध्यान लगाकर मैने ईश्वर से प्रार्थना शुरू की। इस बीच मेरे दिल में खुद को बदलने का ख्याल आया। फिर मैने तय कर लिया कि जब जेल से बाहर निकलूंगा तो इंसानियत का फर्ज निभाने में मदद करूंगा।

जाड़े का एक वाकया याद करते हुए राजा पहली बार किसी असहाय की मदद का संस्मरण सुनाते हैं। कहते हैं कि 20 साल पहले सर्दी की वो शाम थी।  तब फुटपाथ पर एक घायल वृद्ध आदमी को पड़े उन्होंने देखा। हृदय करुणा से भर गया। उन्हें वह घर ले आए। बाल काटे, घाव की मरहम पट्टी की। और खाना-पीना दिए।

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राजा कहते हैं कि जब बुरी आदतों के कारण घर-परिवार और समाज से मेरा बहिष्कार हुआ था तो मैने भी गलियों में जिंदगी काटी थी। इस दौरान देखा था कि तमाम अनाथ बच्चे और बुजुर्ग गलियों में खुले आसमान के नीचे जिंदगी गुजर-बसर करते हैं। मैने उनकी जिंदगी के दर्द को करीब से देखा था। फिर मैने सोच लिया कि अब अपने ऊपर लगे कलंक को समाजसेवा के जरिए धोने की कोशिश करूंगा।

ऑटो राजा ने चार हजार से अधिक लावारिस लोगों की मौत होने पर उनके अंतिम संस्कार किए हैं। पिछले 20 साल से यह कार्य जारी है। राजा का कहना है कि मैं मरने की कगार पर पहुंचे लोगों से अंतिम इच्छा पूछता हूं। कुछ बिरियानी खाना चाहते हैं तो कोई कोक पीना चाहता है कोई गाना सुनना चाहता है तो कोई मूवी देखना चाहते है। तमाम अजीबोगरीब इच्छाएं भी लोग बताते हैं।

घर पर भिखारी लाने के लिए पड़ोसियों और घर वालों ने नाराजगी जाहिर की। कुछ दिनों के बाद उस आदमी के चेहरे पर हमने मुस्कुराहट देखी। जिसने मुझे इस काम के लिए खुशी और हौसला प्रदान किया।

हर आदमी की अंतिम इच्छा वह पूरी करने की  भरपूर कोशिश करते हैं। गरीबों की सेवा पर हर महीने 12 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। अमीर लोगों चंदे से मदद करते हैं।  होम ऑफ होप भवन का नाम है। राजा कहते हैं कि मेरी प्रेरणा मदर टेरेसा हैं। ऑटो राजा की सेवा को देखते हुए वेल्लामल हॉस्पिटल ने उन्हें अपने यहां समारोह में बुलाया। जहां उन्होंने 1500 डॉक्टर्स, नर्स और अन्य मेडिकल स्टाफ को सोशल वर्क पर संबोधित किया।

ऑटो राजा कहते हैं कि -जो मैं कर रहा हूं, वह भगवान का सौंपा कार्य है। मैं सिर्फ भगवान के मिशन का एक छोटा सा टूल हूं। मुझे मदर टेरेसा के सेवा कार्यों से प्रेरणा मिलती है। मैं पूरी जिंदगी असहायों की मदद में बिताना चाहता हूं। इसमें असीम खुशी मिलती है। मुझे जीने का मकसद मिल गया है।

 

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