सुषमा ने माना, US विजिट के दौरान मोदी ने ट्रम्प से सीधे तौर पर एच1बी वीजा का जिक्र नहीं किया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एच1बी वीजा के जरिये अमेरिका में बड़ी संख्या में मौजूद भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के सामने खतरा पैदा कर दिया। हालही में प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान उम्मीद थी कि वह राष्ट्रपति ट्रम्प के सामने इस मुद्दे को उठाएंगे। लेकिन अब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस साफ़ कर दिया है कि  पीएम मोदी ने अपनी यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर सीधे तौर बात नहीं की।

अप्रैल में सख्त किए गए एच1 बी वीजा कानून के मुताबिक सिर्फ कुशल पेशेवरों को ही अमेरिका एच 1 बी वीजा देगा, मतलब सिर्फ कंप्यूटर प्रोग्रामर को एच 1 बी वीजा नहीं मिलेगा। पहले एच1 बी वीजा वालों को कम से कम सालाना 60 हजार डॉलर यानी करीब 40 लाख रुपये देने का नियम था लेकिन अब इसे बढ़ाकर 1 लाख 30 हजार डॉलर यानी करीब 85 लाख रुपये कर दिया गया है।

राज्यसभा में कांग्रेस के सांसद आनंद शर्मा और सीपीएम के सांसद तपन कुमार सेन ने यह सवाल पूछा था कि क्या मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के दौरान एच1बी वीजा के बारे में बातचीत की थी या नहीं। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि ‘भले ही संयुक्त बयान में एच1बी वीजा शब्द का जिक्र नहीं है, पर उन्हें इस बात पर गर्व है कि मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को यह समझाने में सफल रहे कि भारत के आईटी प्रोफेशनल्स ने अमेरिका की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दिया है।

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अमेरिका में भारत की टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो जैसी सॉफ्टवेयर कंपनियों के दफ्तर हैं और उनमें ज्यादातर भारतीय आईटी प्रोफेशनल काम करते हैं। सॉफ्टवेयर इंजीनियर की सैलरी दोगुनी करने के फैसले से कंपनियों की लागत बढ़ रही है। जबकि भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिका में नौकरियों के साथ-साथ वहां की अर्थव्यवस्था में भी योगदान कर रही हैं।

भारतीय IT कंपनी से अमेरिका में 4 लाख नौकरियां मिल रही हैं और अमेरिका को करीब 30 हजार करोड़ बतौर टैक्स चुकाए जा रहे हैं. सिर्फ भारत से हर साल H1B और L1 वीजा के फीस के तौर पर अमेरिका को 6 हजार करोड़ की कमाई होती है।

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